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क्या है योग | Yoga Kya Hai

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योग शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक प्रथाओं या विषयों का एक समूह है जो प्राचीन भारत में उत्पन्न हुआ था। ऐसा अनुमान है योग की उत्पत्ति पूर्व–वैदिक भारतीय परंपराओं में हुई है; इसका उल्लेख ऋग्वेद, में मिलता है। योग–प्रथाओं का वर्णन करने वाले ग्रंथों का कालक्रम स्पष्ट नहीं है लेकिन उपनिषदों को पर्याप्त रूप से श्रेय दिया जाता है।

19वीं सदी के उत्तरार्ध में स्वामी विवेकानंद की सफलता के बाद पश्चिम में योग की शुरुआत भारत के योग गुरुओं ने की, भारत के बाहर, यह एक मुद्रा–आधारित शारीरिक फिटनेस, तनाव–मुक्ति और शांति पाने की तकनीक के रूप में विकसित हुआ है। भारतीय परंपराओं में योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है इसके अपने आध्यात्मिक मूल्य भी है।

योग शब्द का आध्यात्मिक अर्थ पहली बार संस्कृत में मिलता है, जो पतंजलि के योग सूत्र में प्रस्तुत दार्शनिक प्रणाली से जुड़ा हुआ है, जिसका मुख्य उद्देश्य “मानव” को “एकजुट” करना है। क्रियायोग शब्द का अर्थ योग सूत्र में एक तकनीकी अर्थ है, जो दर्शन के “व्यावहारिक” पहलुओं को डिजाइन करता है, अर्थात रोजमर्रा के जीवन में कर्तव्यों के प्रदर्शन के कारण “सर्वोच्च के साथ संघ“।

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पाणिनि के अनुसार, योग शब्द के दो मूल है, युजिर योग अर्थात योग करना तथा युज समाधौ अर्थात ध्यान केंद्रित करना । पाणिनि के अनुसार, व्यास ने योग सूत्रों पर पहला भाष्य लिखा था, जिसमे कहा गया है कि योग का अर्थ समाधि (एकाग्रता) है। उच्च स्तर की प्रतिबद्धता के साथ योग दर्शन का पालन करने वाले को योगी कहा जाता है।

योग क्या है योग की परिभाषा?

प्राचीन धर्म ग्रंथो में भी योग को परिभाषित किया गया है, अलग-अलग धर्म ग्रंथों में योग को अलग-अलग परिभाषित किया गया है-

कथा उपनिषद: जब पाँचो इन्द्रियाँ और मन में सांसारिक भोगों के प्रति लगाव समाप्त हो जाता है तो इसे उच्चतम स्थिति के रूप में जाना जाता है। वे योग को इंद्रियों पर संयम के रूप में मानते हैं।

भगवद गीता: अपने कर्मों में निपुर्ण होना ही योग है।

पतंजलि योग सूत्र: मन की गतिविधियों का दमन ही योग है।

लिंग पुराण: योग शब्द का अर्थ है निर्वाण, अर्थात शिव की स्थिति।

योग का लक्ष्य

योग का अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना है, हालांकि इसका सटीक रूप दार्शनिक या धार्मिक प्रणाली पर निर्भर करता है।

योग से क्या लाभ होता है?

नियमित योग करने से हमें अनेकों लाभ प्राप्त होते है जिनका पूरा वर्णन करना आसान नहीं है।

➣ योग करने से हमारे शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है।
➣ हाथ, पैर, गर्दन, कमर, घुटनों में दर्द या अकड़न होने पर वह ठीक हो जाती है।
➣ नियमित योग करने से हमारी एकाग्रता बढ़ती है और हम किसी भी कार्य को एकाग्रचित्त होकर कर सकते है।
➣ बालों के झड़ने या सफेद होने पर योग करने से बाल झड़ना और सफेद होना बंद हो जाते है। जो नियमित योग करते है उनके बाल लंबे समय तक घने, काले और मजबूत बने रहते है।
➣ नियमित योग करने से आँखों की रोशनी लम्बी उम्र तक बनी रहती है।
➣ नियमित योग करने से व्यक्ति लम्बी उम्र तक स्वस्थ्य जीवन जीता है।
➣ नियमित योग करने से तनाव और मोटापा दूर होता है और हमारी काया सुन्दर बनी रहती है।
➣ नियमित योग करके कई सारी गंभीर बीमारियों (कैंसर, लकवा, तनाव, माइग्रेन, मोटापा) को दूर किया जा सकता है और जिन्हें यह बीमारियाँ नहीं है उन्हें ऐसी बीमारियाँ कभी नहीं होंगी।
➣ यदि आप अपनी हाइट बढ़ाना चाहते है तो नियमित योग करके आप अपनी हाइट बढ़ा सकते है।
➣ योग करने से महिलाओं को मासिक धर्म के समय होने वाली परेशानी दूर होती है।

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योग के कितने प्रकार हैं?

पारंपरिक तौर पर योग के 6 प्रकार माने जाते है। जिनका संक्षेप में यहां वर्णन किया जा रहा है-

(1) हठ योग- ऐसी आरामदायक स्थिति या आसन में बने रहना जो आपके स्वास्थ्य को लाभ दे।
(2) राज योग- राज योग में ध्यान और अनुशासन के द्वारा मन और शरीर को एकाग्र किया जाता है।
(3) कर्म योग- मानवता की सेवा के लिए निस्वार्थ कर्म करना।
(4) भक्ति योग- भक्ति के 9 प्रकार होते है जिनमें निपुणता पाना।
(5) ज्ञान योग- ज्ञान योग में ज्ञान के माध्यम से आत्मबोध प्राप्त किया जाता है।
(6) तंत्र योग- तंत्र योग में अपने दिमाग का विस्तार करके चेतना के सभी स्तरों तक पहुंचा जाता है।

योग हमारे जीवन में क्यों आवश्यक है?

जीवन में हमें अनेकों परेशानियों और समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिससे हम तनाव और बीमारी का शिकार हो जाते है। अपने आप को इन बीमारियों और तनाव से बचाने के लिए और अपने आपको ऊर्जावान बनाये रखने के लिए योग आवश्यक है।

योग हमारे जीवन को कैसे बदल सकता है?

नियमित योग करके हम अपने जीवन में बहुत बड़े परिवर्तन ला सकते है। योग करने से हमारी एकाग्रता बढ़ती है, जिससे हम अपने सभी कार्यों जैसे बिज़नेस, नौकरी, स्टडी को एकाग्र होकर करेंगे जिससे हमे अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। योग करने से तनाव, मोटापा और गंभीर बीमारियाँ दूर रहती है जिससे हम स्वस्थ्य जीवन जी सकते है। यदि किसी को कोई गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, माइग्रेन, मधुमेह है तो योग से उसे ठीक किया जा सकता है और अपनी आयु को बढ़ाया जा सकता है। इस प्रकार योग हमारे जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकता है।

योग का प्रमुख उद्देश्य क्या है?

योग का प्रमुख उद्देश्य अपने आत्म स्वरूप को पह्चानना है जिसके लिए पतंजलि ने अष्टांगिक योग का मार्ग बतलाया है। इस अष्टांगिक योग के मार्ग पर चलकर अपने चित्त की वृत्तियों को रोका जा सकता है और अपने आत्मस्वरूप को जाना जा सकता है जिसे मोक्ष या केवल्य की स्थिति कहा जाता है।

योग का प्रचलित रूप कौन सा है?

योग का प्रचलित रूप अष्टांग योग है जिसमें महर्षि पतंजलि ने मोक्ष प्राप्ति के लिए 8 मार्ग बताये है।

योग का जन्मदाता कौन है?

भगवान शिव शंकर को योग का जन्मदाता माना जाता है उन्हें ही पहला योगी माना जाता है।

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