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होली का क्या महत्त्व है ?

होली का क्या महत्त्व है ?

holi ka mahatva

हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन होली का त्यौहार मनाते है। यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। यह ऐसा त्यौहार है जब सभी लोग आपसी बैर और  गिले-शिकवे भूलकर एक दूसरे को रंग लगाते है और गले मिलते है। यह त्यौहार गर्मिओं के मौसम की शुरुआत और सर्दिओं के मौसम के अंत का भी सूचक है। यह  हर्षोल्लास और मस्ती का त्यौहार है जो सभी के चेहरे पर मुस्कान लाता है।


होली का महत्त्व :


इस त्यौहार का अपना सांस्कृतिक और पौराणिक महत्त्व है जिसका उल्लेख धार्मिक ग्रंथो में भी मिलता है। यह त्यौहार हिन्दुओं के लिए विशेष रूप से महत्त्व रखता है। तो इस त्यौहार के पौराणिक,सांस्कृतिक और सामाजिक महत्त्व को जानते है :-


पौराणिक महत्त्व :


इस त्यौहार का पौराणिक महत्त्व होलिका, प्रहलाद और हिरण्यकश्यप की कथा से चलता है।



प्राचीन समय में हिरण्यकश्यप नामक राजा हुआ करता था जो बहुत ही क्रूर और निर्दई था। वह अपनी प्रजा पर अत्याचार किया करता था और अपनी शक्तिओं के अभिमान में स्वयं को सबसे शक्तिशाली समझता था। उसने अपने राज्य में वैदिक पूजा-पाठ, हवन आदि पर रोक लगा रखी थी और जो भी यह करते पाया जाता उसपर अत्याचार किया करता था।



हिरण्यकश्यप की बहन का नाम होलिका था जिसे वरदान था कि उसे आग जला नहीं सकती।



हिरण्यकश्यप का पुत्र जिसका नाम प्रहलाद था वो बहुत धार्मिक और भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहता था।



हिरण्यकश्यप को प्रहलाद का भगवान विष्णु की भक्ति करना कभी पसंद नहीं था और वह अपने पुत्र से हमेशा क्रोधित रहता था और अपने पुत्र पर अत्याचार किया करता था।  उसने अपने पुत्र  की हत्या करने के कई प्रयास किये जिसका उसके पुत्र पर कोई प्रभाव नहीं हुआ। प्रहलाद हमेशा बच गया। 



जब होलिका जो हिरण्यकश्यप की बहन थी अपने भाई से मिलने उसके राज्य आती है तब हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन से अपने पुत्र के बारे में सारी बात बताई। तब होलिका ने अपने भाई हिरण्यकश्यप को आश्वाशन देते हुए कहा कि तुम चिंता मत करो, मुझे वरदान प्राप्त है आग मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। मैं प्रहलाद को गोद में लेकर  जलती चिता पर बैठ जाऊंगी और वह जल कर राख हो जाएगा। जिससे तुम्हारी समस्या समाप्त हो जायगी।



 जब होलिका प्रहलाद को लेकर जलती हुई चिता पर बैठी तो प्रहलाद के बजाय होलिका ही आग में जल गई और उसका अंत हो गया।



इस तरह से होलिका दहन कि शुरूआत बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में हुई।




सांस्कृतिक महत्त्व :


इस त्यौहार का अपना सांस्कृतिक महत्त्व भी है। आम धारणा है कि असत्य पर सत्य की जीत होती है और जो सत्य के मार्ग पर चलता है परमात्मा हमेशा उसकी रक्षा करते है साथ ही बुरी शक्तियों से भी बचाते है। जब होलिका दहन किया जाता है तब होलिका की पूजा की जाती है और सुख, शांति, समृद्धि की कामना की जाती है। एक धारणा यह भी है कि नई फसल के आने पर लोग अपनी ख़ुशी व्यक्त करने के लिए होली मनाते है।




सामाजिक महत्त्व :


होली उत्सव अपना अलग सामाजिक महत्त्व भी रखता है। होली के आने पर लोग आपसी बैर, भेद-भाव की भावना त्यागकर सभी से प्रेम पूर्वक मिलते है जिससे समाज में एकता बढ़ती है।


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