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उत्तानपादासन / Uttanpadasana In Hindi

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उत्तानपादासन / Uttanpadasana In Hindi

इस आसन को करते समय पीठ के बल लेट कर पैरों को ऊपर उठाया जाता है, इस कारण इसे उत्तानपादासन कहा जाता है क्योंकि उत्तान का अर्थ ऊपर उठा हुआ और पाद का अर्थ पैर होता है। इस आसन को करने से पेट की चर्बी जल्दी कम होती है साथ ही शरीर मजबूत और लचीला बनता है।

उत्तानपादासन की विधि:

➤ इस आसन को करने के लिए योग मेट या चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाये और दोनों पैरों को आपस में मिला लें।
➤ अब साँस लेते हुए अपने दोनों पैरों को जमीन से थोड़ा ऊपर उठाने का प्रयास करें, ऐसा करते समय आपके पैरों के घुटने सीधे रहने चाहिए।
➤ इस स्थिति में जितना संभव हो सके रुकने का प्रयास करें फिर धीरे-धीरे साँस छोड़ते हुए पैरों को वापस जमीन पर ले आये।
➤ इस तरह यह एक चक्र पूरा हुआ, आप इसके 5 चक्र कर सकते है।
➤ इस आसन को करने से पहले सर्वांगासन और हलासन कर सकते है और इसके बाद शीर्षासन कर सकते है।

उत्तानपादासन के लाभ:

➤ इस आसन को करने से पेट और पैरों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।
➤ उत्तानपादासन करने से पाचन शक्ति बढ़ती है और पाचन तंत्र सही तरह से कार्य करता है।
➤ इस आसन को करने से पैरों की समस्यायें जैसे पैरों में झुनझुनी आना, पैरों में सूजन आना और पैरों में दर्द होने की समस्या दूर होती है।
➤ जो महिलायें उत्तानपादासन नियमित रूप से करती है उन्हें प्रसव के समय बहुत लाभ होता है और प्रसव से जुडी परेशानियाँ नहीं होती।
➤ हार्निया रोग को दूर करने के लिए भी यह आसन लाभदायक है।
➤ इस आसन से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में किसी प्रकार की अकड़न हो तो वो भी दूर हो जाती है।
➤ उत्तानपादासन करने से पेट से जुडी बीमारियाँ जैसे- कब्ज़, गैस, बदहज़मी की समस्या दूर होती है।
➤ जिन्हें थायरॉइड, शुगर की समस्या हो उनके लिए भी यह आसन लाभदायक होता है।
➤ अगर किसी की नाभि अपने स्थान से हट गई है तो इस आसन के अभ्यास से उसे वापस स्थान पर लाया जा सकता है।

उत्तानपादासन की सावधानियाँ:

➤ किसी भी योगासन को अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए।
➤ यदि ब्लड प्रेशर या माइग्रेन की समस्या हो तो यह आसन ना करें।
➤ अगर पीठ या गर्दन में किसी प्रकार का दर्द हो तो भी यह आसन ना करें या किसी चिकित्सक की सलाह से ही करें।
➤ गर्भावस्था में भी महिलाओं को यह आसन नहीं करना चाहिए।

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