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वीरभद्रासन की विधि, लाभ वा सावधानियाँ / Virabhadrasana Steps, Benefits And Precautions In Hindi

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वीरभद्रासन की विधि, लाभ वा सावधानियाँ / Virabhadrasana Steps, Benefits And Precautions In Hindi

वीरभद्रासन (Virabhadrasana) एक ऐंसी मुद्रा है जिसकी उत्पत्ति भगवान शिव के एक गण से मानी जाती है जिसका नाम वीरभद्र था। यह आसन कंधे, हाथों, कमर के लिए बहुत लाभदायक होता है। वीरभद्रासन करने की तीन विधियाँ है यहाँ हम उन तीनों विधियों के बारे में जानकारी दें रहें है।

वीरभद्रासन 1 की विधि / Virabhadrasana 1 Steps In Hindi :

➤वीरभद्रासन 1 करने के लिए सबसे पहले योग मेट बिछाकर सीधे खड़े हो जाये।
➤अब अपने दाये पैर को जितना हो सके आगे ले जाने का प्रयास करें।
➤अब अपने दाये पैर के घुटने को मोड़ते हुए दाये पैर के पंजे की सीध में लाये। बायें पैर का घुटना सीधा ही रहेगा।
➤इसके बाद अपने दोनों हाथों को कमर के बगल से ऊपर उठाने का प्रयास करें और हाथों की हथेलियों को आपस में मिला लें। आपकी उंगलियों की दिशा आसमान की तरफ होना चाहिए।
➤अपनी गर्दन को भी थोड़ा ऊपर उठायें।
➤इस स्थिति में सामान्य रूप से साँस लेते रहें और 20 से 25 सेकंड तक रुकने का प्रयास करें।
➤इस तरह यह आसन दाये पैर से हुआ अब इसे बाये पैर से दोहरायें।
➤यह थी वीरभद्रासन 1 करने की विधि। वीरभद्रासन 1 करने से पहले उत्कटासन करना अच्छा होता है साथ ही इसके बाद वीरभद्रासन 2, पश्चिमोत्तानासन करना चाहिए।

वीरभद्रासन 2 की विधि / Virabhadrasana 2 Steps In Hindi :

➤वीरभद्रासन 2 (Virabhadrasana 2) करने के लिए सबसे पहले कोई चटाई या योग मेट बिछाकर सीधे खड़े हो जायें।
➤अब अपने पैरों को लगभग 3 फुट तक फैलाले। दोनों पैर एक-दूसरे के समानांतर होना चाहिए।
➤ अब अपने दोनों हाथों को कमर के बगल से ऊपर उठायें और उन्हें तब तक ऊपर उठायें जब तक वें जमीन के सामानांतर नहीं आ जाते।
➤हाथों की हथेलियाँ जमीन की दिशा में सीधी होनी चाहिए।
➤अब अपने बाये पैर और हाथों को उसी स्थिति में रखते हुए दाये पैर और कमर, कंधे और सिर को दाये तरफ घुमाये। ऐसी स्थिति में सिर. दाहिना हाथ और दाहिनें पैर का पंजा एक ही सीध में होना चाहिए।
➤इसके बाद अपने दाये पैर के घुटने को मोड़कर थोड़ा आगे होने का प्रयास करे। ऐसी स्थिति में दाये पैर का घुटना और पंजा एक सीध में होना चाहिए।
ऐसा करते समय बाये पैर का घुटना और रीढ़ की हड्ड़ी सीधी होनी चाहिए।
➤अब कुछ देर तक इस स्थिति में रुकने का प्रयास करे और उसके बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाये।
➤यही प्रक्रिया बायें तरफ मुड़कर भी करे।
➤इस तरह वीरभद्रासन 2 (Virabhadrasana 2) पूरा हुआ। वीरभद्रासन 2 (Virabhadrasana 2) करने से पहले उत्कटासन और वीरभद्रासन 1 अवश्य करना चाहिए। साथ ही वीरभद्रासन 2 करने के बाद पश्चिमोत्तनासन करना चाहिए।

वीरभद्रासन 3 की विधि / Virabhadrasana 3 Steps In Hindi :

वीरभद्रासन 3 करने में थोड़ा कठिन होता है क्योंकि इसमें आपके एक पैर पर ही पूरे शरीर का वजन होता है। इसलिए इसे सावधानी से करना चाहिए।

➤ वीरभद्रासन 3 करने के लिए सबसे पहले योग मेट या चटाई बिछाकर सीधे खड़े हो जाये।
➤अब अपने दाये पैर को थोड़ा सा आगे करे और अपने शरीर का पूरा वजन दाये पैर पर रखें।
➤अब अपनी कमर को सीधा रखते हुए कमर को सामने की तरफ झुकायें और साथ ही अपने बाये पैर को ऊपर उठाने का प्रयास करें।
➤इसके बाद अपने हाथों की हथेलियों को आपस में मिलाले और अपने हाथों को सिर के ऊपर तक करें, हाथ सीधे होने चाहिए और कान से लगे हुए होने चाहिए।
➤इस स्थिति में कुछ देर रुकने का प्रयास करे और उसके बाद सामान्य स्थिति में वापस आ जाये।
➤अब यही प्रक्रिया बाये पैर से भी दौहराये।
➤ वीरभद्रासन 3 करने से पहले वीरभद्रासन-1, वीरभद्रासन-2, वृक्षासन और त्रिकोणासन का अभ्यास करना चाहिए।

यह भी पढ़े :- उत्कटासन की विधि, लाभ व सावधानियाँ

वीरभद्रासन के लाभ / Virabhadrasana Benefits In Hindi :

➤इस आसन को करने से हाथ, पैर और कमर की मांसपेशियाँ मजबूत होती है। 
➤यह आसन साइटिका के रोगियों के लिए बहुत लाभदायक होता है।
➤यह आसन शरीर के संतुलन को बढ़ाता है।
➤जिन लोगों को लम्बे समय तक बैठकर कार्य करना होता है उनके लिए भी यह आसन बहुत लाभदायक होता है।
➤यह आसन कंधे, पीठ, गर्दन की मांसपेशियों में किसी प्रकार की अकड़न या तनाव होने पर उसे दूर करता है।

यह भी पढ़े :- पश्चिमोत्तासन की विधि, लाभ व सावधानियाँ

वीरभद्रासन की सावधानियाँ / Virabhadrasana Precautions In Hindi :

➤अगर रीढ़ की हड्ड़ी, गर्दन, कंधे में किसी प्रकार का दर्द या कोई समस्या हो तो यह आसन ना करे या किसी चिकित्सक की सलाह से ही करें।
➤जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो वें यह आसन ना करें।
➤अगर पेट से संबंधित कोई बीमारी हो तो भी यह आसन नहीं करना चाहिए।
➤महिलाओं को गर्भावस्था में यह आसन किसी चिकित्सक से सलाह लेकर ही करना चाहिए।
➤किसी भी आसन को करते समय अपनी क्षमता से अधिक जोर नहीं लगाना चाहिए। 

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