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चक्की चलनासन / Chakki Chalanasana

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चक्की चलनासन / Chakki Chalanasana

यह आसन करने में बहुत ही आसान होता है और इसे कोई भी कर सकता है। जिस तरह पुराने समय में अनाज पीसने के लिए हाथ चक्की चलाई जाती थी उसी तरह यह आसन किया जाता है।

चक्की चलनासन की विधि:

➤ इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योग मेट बिछाकर बैठ जाये।
➤ अब अपने दोनों पैरों को सामने की तरफ फैलाले और पैरों के घुटने सीधे रहने चाहिए।
➤ दोनों पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें।
➤ अब अपने दोनों हाथों को आपस में मिला ले और हाथों की कोहनियाँ सीधी रहनी चाहिए।
➤ जिस तरह चक्की चलाने के लिए हाथों को घुमाया जाता है उसी तरह इस आसन को करते समय भी हाथों को घुमाना है। पहले किसी एक दिशा में हाथों को घुमाना है फिर उसके विपरीत दिशा में हाथों को घुमाना है।


➤ हाथों को घुमाते समय आगे झुकने पर हाथ पैरों के पंजों से आगे से होकर वापस आपकी जांघों के ऊपर से निकलना चाहिए और ऐसा करते समय आपकी कोहनियाँ सीधी रहनी चाहिए।
➤ हाथों को घुमाते समय सामान्य रूप से साँस लेते रहें। आगे झुकते समय साँस ले और पीछे जाते समय साँस छोड़े।
➤ हाथों को 25-50 बार और क्षमता अनुसार इससे ज्यादा बार भी घुमाया जा सकता है।
➤ जितने बार हाथों को एक दिशा में घुमाये उतने ही बार इसके विपरीत दिशा में भी घुमाये।

चक्की चलनासन के लाभ:


➤ इस आसन को करने से हाथ, पैर, पीठ की मसल्स मजबूत होती है।
➤ यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाता है।
➤ इस आसन को करने से शरीर में जमी अतिरिक्त चर्बी कम होती है जिससे वजन कम होता है।
➤ इस आसन को करने से नींद ना आने की समस्या दूर होती है और अच्छी नींद आती है।
➤ यह आसन शरीरिक शक्ति को भी बढ़ाता है।
➤ यह आसन महिलाओं के लिए भी लाभदायक है क्योंकि इससे गर्भाशय की मांसपेशियों का अच्छा व्यायाम होता है।
➤ यह आसन तनाव को भी कम करता है।
➤ इस आसन को करने से एकाग्रता बढ़ती है।
➤ यह आसन गर्भावस्था में जमी चर्बी को भी कम करता है।
➤ इस आसन को करने से महिलाओं को मासिक धर्म के समय होने वाली समस्यायें भी दूर होती है।
➤ इस आसन को करने से छाती और कटिप्रदेश में फैलाव आता है।
➤ साइटिका के रोगियों के लिए भी यह आसन लाभदायक है।

चक्की चलनासन की सावधानियाँ:

➤ जिन्हें ब्लड प्रेशर, माइग्रेन की समस्या हो उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।
➤ पीठ में दर्द या स्लिप डिस्क की समस्या होने पर भी यह आसन नहीं करना चाहिए।
➤ गर्भावस्था में भी यह आसन नहीं करना चाहिए।
➤ किसी भी आसन को करते समय अपनी क्षमता के अनुसार ही ताकत लगाना चाहिए।

यह भी पढ़े:-

अर्धचक्रासन
पार्श्वकोणासन की विधि, लाभ और सावधानियाँ
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