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त्रिकोणासन इनफार्मेशन इन हिंदी / Trikonasana Information In Hindi

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त्रिकोणासन इनफार्मेशन इन हिंदी / Trikonasana Information In Hindi

त्रिकोण का अर्थ होता है तीन कोणों वाला और आसन का अर्थ मुद्रा या स्थिति से होता है। इस आसन को करने से पूरा शरीर सही तरह से कार्य करता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से वजन आसानी से घटाया जा सकता है।

त्रिकोणासन की विधि:

➤ इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योग मेट बिछाले और उस पर सीधे खड़े हो जाये।
➤ अब अपने दोनों पैरों को कंधे की सीध तक फैलाले, ऐसी स्थिति में आपके दोनों पैर के पंजे एक दूसरे के सामानांतर होने चाहिए।
➤ अब अपने दोनों हाथों को कंधों की सीध तक उठायें ऐसी स्थिति में दोनों हाथ जमीन से सामानांतर होने चाहिए।
➤ अब अपनी कमर को दायें तरफ झुकाते हुए अपने दायें हाथ से दायें पैर के पंजे को छूने का प्रयास करें।


➤ कमर को झुकाते हुए साँस छोड़े।
➤ दायें तरफ झुकते समय आपकी नज़र बायें हाथ की उंगलियों पर रहनी चाहिए।
➤ कमर को झुकाते समय दोनों हाथ कंधे की सीध में ही रहने चाहिए।
➤ अब साँस लेते हुए वापस सामान्य स्थिति में आ जायें।
➤ अब यही प्रक्रिया बायें हाथ से बायें पैर के पंजे को छूकर दौहरायें और ऐसा करते समय आपकी नज़र दायें हाथ की उंगलियों पर रहनी चाहिए।
➤  त्रिकोणासन करने से बाद वीरभद्रासन करना चाहिए।

त्रिकोणासन के लाभ:

➤ इस आसन को करने से पाचन शक्ति बढ़ती है।
➤ घुटनों में किसी प्रकार की तकलीफ हो तो वो दूर होती है।
➤ त्रिकोणासन करने से वजन भी नियंत्रित होता है।
➤ पेट से जुडी समस्यायें जैसे गैस, कब्ज़ को भी यह आसन दूर करता है।
➤ इस आसन को करने से आँतो को भी लाभ होता है।
➤ त्रिकोणासन करने से हाथ, पैर, घुटने, ऐड़िया और वक्षस्थल भी मजबूत होता है।
➤ इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत और लचीली बनती है।
➤ त्रिकोणासन करने से चिंता और तनाव भी दूर होता है।
➤ पीठ दर्द और साइटिका के रोगियों को भी इस आसन से लाभ होता है।
➤ यह आसन पूरे शरीर को सुडौल, लचीला और मजबूत बनाता है।

त्रिकोणासन की सावधानियाँ:

➤ हाई या लो ब्लड प्रेशर, माइग्रेन, पीठ या गर्दन में दर्द होने पर यह आसन नहीं करना चाहिए।
➤ अपनी क्षमता के अनुसार ही शक्ति लगाना चाहिए।
➤ कोई गंभीर बीमारी होने पर किसी चिकित्सक से सलाह लेने के बाद ही त्रिकोणासन करना चाहिए।
➤  गर्दन में दर्द होने पर ऊपर देखने के बजाये सामने देखना चाहिए।

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