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पश्चिमोत्तानासन के लाभ | Paschimottanasana Benefits In Hindi

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पश्चिमोत्तानासन एक ऐसा आसान है जिसे बैठकर, पैरों को सीधा रखके, सामने की तरफ झुककर किया जाता है। पश्चिम का अर्थ होता है शरीर का पिछला हिस्सा या पश्चिम दिशा, उत्तान का अर्थ होता है खिंचाव, आसन का अर्थ मुद्रा या बैठने का तरीका होता है। इस तरह से पश्चिमोत्तानासन का अर्थ हुआ ऐसी मुद्रा जिसमें शरीर के पीछे की तरफ खिंचाव आता है उसे पश्चिमोत्तानासन कहा जाता है।

पश्चिमोत्तानासन क्या है?

ऐसा माना जाता है कि पश्चिमोत्तानासन हठयोग के 12 मूल आसनों में से एक है और यह अष्टांग योग श्रंखला में आता है। इसका वर्णन शिव संहिता में वर्णित आसनों में किया गया है। ऐसा माना जाता है कि शरीर में प्राणों को संतुलित करने के लिए पश्चिमोत्तानासन किया जाता है।

पश्चिमोत्तानासन करने की विधि (Paschimottanasana steps in Hindi )

➣ पश्चिमोत्तानासन करने के लिए योग मेट पर दंडासन में बैठ जाएं।
➣ अपनी रीढ़ की हड्डी और कमर को सीधा रखें।
➣ अब सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाएं।
➣ हाथ की कोहनियाँ सीधी रहनी चाहिए।
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➣ अब सांस छोड़ते हुए, अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए सामने की तरफ झुकना शुरू करें और अपने हाथों से पैर के पंजों को पकड़ने का प्रयास करें।
➣ अपने माथे को घुटनों से लगाने का प्रयास करें।
➣ कुछ देर तक इस स्थिति में रुके और फिर सांस लेते हुए वापस दंडासन की स्थिति में आ जाएं।
➣ यह एक चक्र हुआ, इस तरह से 12 से 15 चक्र करें।

पश्चिमोत्तानासन के लाभ (Paschimottanasana Benefits In Hindi)

➣ पश्चिमोत्तानासन के नियमित अभ्यास से मन शांत होता है और तनाव दूर होता है।
➣ पश्चिमोत्तानासन पाचन शक्ति को बढ़ाता है जिससे पेट से संबंधित बीमारियां, गैस, अपच की समस्या दूर होती है।
➣ पश्चिमोत्तानासन करने से कंधे, रीड की हड्डी में खिंचाव आता है जिससे इनकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
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➣ इस आसन के नियमित अभ्यास से थकान, सिरदर्द, चिंता आदि परेशानियां दूर होती हैं।
➣ यदि आपको उच्च रक्तचाप, अनिद्रा, बांझपन की समस्या है तो पश्चिमोत्तानासन आप को लाभ पहुंचा सकता है।
➣ इसे करने से मोटापा कम होता है और भूख अच्छी लगती है।
➣ पश्चिमोत्तानासन अंडाशय, गर्भाशय, गुर्दे, जिगर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है।
➣ यदि महिलाओं को मासिक धर्म या रजोनिवृत्ति में परेशानी होती है तो पश्चिमोत्तानासन करने से यह परेशानियां दूर होती हैं।

पश्चिमोत्तानासन की सावधानियां

➣ पश्चिमोत्तानासन करते समय सामने की तरह बहुत जोर नहीं लगाना चाहिये, जितना आप आसानी से झुक सकते हैं उतना ही झुके।
➣ कोई भी योग अभ्यास करते समय अपनी क्षमता से ज्यादा ताकत ना लगाएं।
➣ यदि आप को दस्त या अस्थमा की परेशानी है तब पश्चिमोत्तानासन ना करें।
➣ पीठ में दर्द होने पर, कंधे, गर्दन में, कमर में दर्द होने पर पश्चिमोत्तानासन ना करें।
➣ सर्जरी होने पर, गंभीर चोट लगने पर भी पश्चिमोत्तानासन ना करें।
➣ गर्भावस्था में महिलाओं को भी यह आसन नहीं करना चाहिए।
➣ कोई भी योगाभ्यास करने से पहले उस बारे में पूरी जानकारी जुटा लेना चाहिए और किसी विशेषज्ञ से सलाह भी ले लेना चाहिए उसके बाद ही योगाभ्यास करना चाहिए।

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