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शीर्षासन के लाभ | Shirshasana Benefits In Hindi

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शीर्षासन दो शब्दों से मिलकर बना है शीर्ष और आसन। शीर्ष का अर्थ होता है सिर और आसन का अर्थ होता है योग मुद्रा, अर्थात ऐसा आसन जिसमें हमारे शरीर का पूरा संतुलन सिर पर होता है उसे शीर्षासन कहा जाता है। इसे अंग्रेजी में हेड स्टैंड पॉज (Head Stand Pose) के नाम से भी जाना जाता है। शीर्षासन करने में कठिन होता है इसलिए योग की शुरुआत करने वालों को शीर्षासन करने में परेशानी हो सकती है, लेकिन इसके नियमित अभ्यास से शीर्षासन करना आसान हो जाता है।

शीर्षासन एक ऐसा आसन है जो पूरे शरीर को लाभ पहुंचाता है क्योंकि शीर्षासन करते समय रक्त परिसंचरण पूरे शरीर में होता है। शीर्षासन करने से ना केवल गर्दन की मांसपेशियां मजबूत होती हैं बल्कि इससे हमें अन्य लाभ भी प्राप्त होते हैं जिनका वर्णन विस्तार से किया जा रहा है।

शीर्षासन के लाभ (Shirshasana Benefits In Hindi)

➣ शीर्षासन करने से एकाग्रता बढ़ती है और ध्यान करने की क्षमता में सुधार होता है।
➣ इसके नियमित अभ्यास से संतुलन बनाने की क्षमता भी अच्छी होती है।
➣ शीर्षासन करने से रक्त का प्रभाव सिर की तरफ होता है जिससे बाल झड़ने और असमय सफेद होने की समस्या से राहत मिलती है।
➣ शीर्षासन का नियमित अभ्यास नींद की गड़बड़ी को दूर करता है।
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➣ इसे करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है और पाचन से संबंधित समस्याएं, गैस, अपच की परेशानी भी दूर होती है।
➣ शीर्षासन करने से चेहरे पर चमक बढ़ती है क्योंकि चेहरे की तरफ ऑक्सीजन का प्रभाव बढ़ता है।
➣ शीर्षासन करने से कमर दर्द में भी राहत मिलती है।
➣ जिन्हें तनाव या अवसाद की समस्या है उन्हें शीर्षासन करने से लाभ होता है, क्योंकि शीर्षासन मन को शांत करता है।
➣ इसके नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी, गर्दन की मांसपेशियां, हाथ और पैर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
➣ शीर्षासन करने से फेफड़ों की कार्य क्षमता में भी सुधार होता है।
➣ इसे करने से पिट्यूटरी और पीनियल ग्रंथियों में उत्तेजना बढ़ती है।
➣ इसका नियमित अभ्यास अस्थमा, बांझपन, साइनस जैसी बीमारियों में भी लाभदायक होता है।
➣ जिन महिलाओं को रजोनिवृत्ति में परेशानी होती है उन्हें भी यह लाभ पहुंचाता है।

शीर्षासन कैसे करते हैं?

➣ शीर्षासन करने के लिए सबसे पहले घुटनों के बल योग मेट या कंबल में बैठ जाएं।
➣ अब अपने दोनों हाथों की हथेलियां आपस में मिला लें।
➣ अब अपने हाथों और कोहनियों को सामने की तरफ जमीन पर रखें और धीरे-धीरे अपने सिर को हथेलियों पर रखें।
➣ अपने पूरे वजन को हथेलियों पर और कोहनियों पर संतुलन बनाकर रखें।
➣ इसके बाद अपने पैरों को सावधानी से ऊपर उठा ले।
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➣ पैरों को सीधा ऊपर रखें।
➣ ऐसी स्थिति में आपके शरीर का पूरा वजन आपके सिर पर रहेगा।
➣ सामान्य रूप से सांस लेना है और अपनी नजरों को आप सामने रख सकते हैं या अपनी आंखें बंद कर लें।
➣ कुछ देर तक ऐसी स्थिति में बने रहे इसके बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।
➣ जितनी देर आप शीर्षासन करते हैं उतनी ही देर या तो आप शवासन कर ले या उतनी ही देर आप सीधे खड़े रहे।

शीर्षासन कितनी देर करना चाहिए?

यदि आप शीर्षासन करने की शुरुआत कर रहे हैं तो शुरुआत में आपको उतना ही करना चाहिए जितना आप आसानी से शीर्षासन में रुक सकते हैं। यदि आप आधा मिनट भी शीर्षासन में रुक रहे हैं तो इतना भी पर्याप्त है। नियमित अभ्यास करने से शीर्षासन में रुकने का समय बढ़ता जाएगा और फिर आप इसे बढ़ाते जाएं।

शीर्षासन की सावधानियां

➣ यदि आपको सिर में चोट, गर्दन में दर्द, ह्रदय से संबंधित कोई रोग, सर्दी, कब्ज़, उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं हैं तब आपको शीर्षासन नहीं करना चाहिए।
➣ महिलाओं को मासिक धर्म के समय शीर्षासन नहीं करना चाहिए।
➣ गर्भावस्था में भी शीर्षासन ना करना ही बेहतर होता है।
➣ शीर्षासन करते समय अपनी क्षमता के अनुसार ही जोर लगाना चाहिए।
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➣ शीर्षासन करते समय सांस बहुत तेजी से नहीं लेना चाहिए, सामान्य रूप से सांस लेना चाहिए।
➣ शीर्षासन के दौरान कोहनियों को बहुत ज्यादा चौड़ा नहीं करना चाहिए।

आम तौर पर पूंछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQs)

Q1. शीर्षासन कितनी उम्र तक करना चाहिए?

शीर्षासन करने की कोई अधिकतम उम्र नहीं होती है, जिस उम्र तक आप शीर्षासन को आसानी से कर सकते हैं उस उम्र तक आप शीर्षासन करें।

Q2. कौन सा आसन सभी आसनों का राजा है?

शीर्षासन को सभी आसनों का राजा माना जाता है क्योंकि शीर्षासन करने से पूरे शरीर में रक्त का संचार होता है और पूरे शरीर को लाभ होता है।

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