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भस्त्रिका प्राणायाम के फायदे | Bhastrika Pranayama Benefits In Hindi

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भस्त्रिका प्राणायाम इन हिंदी (Bhastrika Pranayama In Hindi)

भस्त्रिका का अर्थ होता है “धौंकनी” धौंकनी ऐसा यंत्र होती है जिससे लौहार आग को हवा देकर लोहे को तपाने का कार्य करता है। लोहे को तपाने से लोहे में मौजूद अशुद्धियां दूर हो जाती हैं, उसी प्रकार भस्त्रिका प्राणायाम करने से हमारे अंदर मौजूद अशुद्धियां दूर हो जाती हैं।

हमारे शरीर में वात, पित्त, कफ जैसी समस्याएं मुख्य रूप से पाई जाती हैं जो कई सारी बीमारियों का कारण बनती है। साथ ही आज के समय में प्रदूषण इतना ज्यादा बढ़ गया है कि सांस लेने से प्रदूषित वायु हमारे शरीर में प्रवेश कर जाती है जिसमें कई सारे ऐसे तत्व होते हैं जो हमारे लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक होते हैं और कई सारी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। दमा, टीवी, साँस से जुड़ी बीमारियां, लीवर और किडनी में परेशानी इन्हीं सब चीजों का परिणाम होती है।

नियमित रूप से भस्त्रिका प्राणायाम करके हम अपने शरीर को स्वस्थ बना सकते हैं और इन गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं।

भस्त्रिका प्राणायाम के फायदे (Bhastrika Pranayama Benefits In Hindi)

➣ भस्त्रिका प्राणायाम करने से वात, पित्त और कफ की समस्याएं दूर होती हैं।
➣ इस प्राणायाम को करने से हमारे शरीर में प्राणवायु अधिक मात्रा में पहुंचती है जिसके कारण सभी अंगों में मौजूद दूषित पदार्थ बाहर हो जाते हैं।
➣ भस्त्रिका प्राणायाम करते समय हम तेजी से श्वास लेते और छोड़ते हैं जिससे हमारे शरीर में ऑक्सीजन अधिक मात्रा में पहुंचती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकल जाती है। ऐसा करने से फेफड़ों की कार्य क्षमता बढ़ती है।
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➣ भस्त्रिका प्राणायाम हृदय में मौजूद रक्त नलिकाओं को शुद्ध और मजबूत बनाता है।
➣ भस्त्रिका प्राणायाम करने से पेट से संबंधित बीमारियां भी दूर होती हैं जैसे कि गैस, अपच और पाचन शक्ति भी मजबूत होती है।
➣ मस्तिष्क से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए भी भस्त्रिका प्राणायाम लाभदायक है।
➣ इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से आंख, नाक, कान से संबंधित परेशानियां भी दूर होती हैं।
➣ यदि आपके लीवर, किडनी में कोई परेशानी है तो इसे करने से ये परेशानियां भी दूर होती हैं।
➣ मोटापा होने पर भी भस्त्रिका प्राणायाम लाभदायक होता है। इसे करने से मोटापा दूर होता है।
➣ दमा, टीबी और श्वास से संबंधित रोग होने पर भी भस्त्रिका प्राणायाम लाभ पहुंचाता है।
➣ भस्त्रिका प्राणायाम करने से तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है।
➣ इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलती हैं।
➣ यदि आपके गले में सूजन या कफ है तो भस्त्रिका प्राणायाम करने से यह परेशानी भी दूर होती है।

भस्त्रिका आसन कैसे करते हैं?

➣ भस्त्रिका प्राणायाम करने के लिए सिद्धासन, पद्मासन या सुखासन में आराम से बैठ जाएं।
➣ अपनी गर्दन और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और आपकी नजर सामने की तरफ होना चाहिए।
➣ अपने मुंह को बंद करें और तेजी से सांस खींचें और फिर साँस को पूरा बाहर निकाल दें।
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➣ इस प्रक्रिया को करते समय आपकी छाती फूलना चाहिए जिस प्रकार धोंकनी से हवा करते समय धौंकनी फूलती है।
➣ जब आप साँस लेंगे तब आपका पेट पूरी तरह फूलना चाहिए और सांस छोड़ने पर पेट अंदर होना चाहिए।
➣ शुरुआत में आपको सांस लेने और सांस छोड़ने की गति धीमी रखनी है और धीरे-धीरे करके इसे बढ़ाना है।

भस्त्रिका प्राणायाम कितनी देर करना चाहिए?

यदि आपने अभी-अभी भस्त्रिका प्राणायाम करना शुरू किया है तो आपको 2 से 3 मिनट भस्त्रिका प्राणायाम करना चाहिए, फिर धीरे-धीरे इसके समय को बढ़ाते जाना चाहिए। यदि आपको कोई गंभीर बीमारी है जैसे कि कैंसर तब आप भस्त्रिका प्राणायाम 5 मिनट कर सकते हैं। भस्त्रिका प्राणायाम करने से पहले किसी योग विशेषज्ञ से भी आप सलाह ले सकते हैं।

भस्त्रिका प्राणायाम की सावधानियां

➣ भस्त्रिका प्राणायाम करने से पहले अपनी नाक साफ कर लेना चाहिए।
➣ कोई भी प्राणायाम हमेशा सुबह के समय, खाली पेट और साफ हवादार स्थान पर ही करना चाहिए।
➣ प्राणायाम करते समय अपनी क्षमता से अधिक जोर नहीं लगाना चाहिए।
➣ भस्त्रिका प्राणायाम दिन में केवल एक बार ही करना चाहिए।
➣ भस्त्रिका प्राणायाम करते समय अपने शरीर को जोर-जोर से हिलाना या झटके नहीं देना चाहिए।
➣ जब आप यह प्राणायाम करते हैं तब सांस लेने और सांस छोड़ने का समय एक बराबर होना चाहिए।
➣ यदि आपने अभी-अभी भस्त्रिका प्राणायाम करने की शुरुआत की है तो आपको 10 बार यह प्राणायाम दोहराना चाहिए।
➣ शुरुआत में किसी भी प्राणायाम को धीरे-धीरे ही करना चाहिए।
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➣ भस्त्रिका प्राणायाम करते समय दोनों ही नासिका से एक साथ ही सांस को लिया जाता है और छोड़ा जाता है।
➣ भस्त्रिका प्राणायाम करने के बाद अपनी सांसो को सामान्य करने के लिए अनुलोम विलोम प्राणायाम जरूर करें।
➣ यदि आपको कोई गंभीर बीमारी जैसे कि हर्निया, दमा, टीवी, पथरी, मिर्गी, हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक वगैरह है तब आपको किसी योग के विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लेना चाहिए।
➣ गर्भावस्था में महिलाओं को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।
➣ यदि आपके फेफड़े, गले, हृदय में किसी प्रकार की परेशानी है या आपकी नाक बंद है तब भी आपको किसी योग के विशेषज्ञ या चिकित्सक से सलाह ले लेना चाहिए।

सारांश

भस्त्रिका प्राणायाम करने से हमें अनेको लाभ प्राप्त होते हैं। भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास हमेशा सुबह के समय, खाली पेट ही करना चाहिए और हवादार स्थान पर ही करना चाहिए। इसका अभ्यास करते समय हमें कुछ सावधानियों का भी विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। यदि इन बातों का ध्यान रखा जाता है तो भस्त्रिका प्राणायाम करने से हमें कई सारे लाभ होंगे और जो बीमारियां हैं वह भी पूरी तरह ठीक हो जाएंगी।

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