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बवासीर के लिए योग- बवासीर का प्राकृतिक उपचार

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बवासीर के लिए योग- बवासीर का प्राकृतिक उपचार

वर्तमान में हम जिस तरह की भागदौड़ भरी जिंदगी जी रहे हैं ऐसे में ना ही हम अपनी सेहत का ध्यान रख रहे हैं, ना ही हम अच्छा खाना खा रहे हैं और ना ही हम पर्याप्त नींद ले पा रहे हैं। हम जंक फूड, फास्ट फूड का अधिक सेवन कर रहे हैं जिससे हमारे शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती, तली-भुनी, मसालेदार चीजों का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन हमारे स्वास्थ्य को कई तरह से नुकसान पहुंचाता है जिससे हमारा पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। ऐसे में कब्ज और बवासीर जैसी बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है।

बवासीर में बहुत दर्द होता है और धीरे-धीरे इंसान कमजोर होता जाता है। बवासीर खूनी, बादी और मस्से वाली हो सकती है, इसके इलाज के लिए अक्सर लोग दवाइयों का सेवन करते हैं या ऑपरेशन करवाते हैं। जब बवासीर अत्यधिक बढ़ जाता है तब ऑपरेशन कराने की नौबत आ जाती है। कई बार ऑपरेशन कराने पर भी बवासीर से पूरी तरह छुटकारा नहीं मिल पाता और ऑपरेशन में बहुत अधिक धन भी खर्च होता हैं।

ऐसे में बवासीर की समस्या का सबसे कारगर उपाय योग है। नियमित रूप से योग करके आप अपनी पाचन शक्ति को बढ़ा सकते हैं और पेट से जुड़ी बीमारियां जैसे कि कब्ज़, अपच, गैस, बवासीर से हमेशा के लिए राहत पा सकते हैं।

यहां पर हम बवासीर के लिए योग आसन बता रहे हैं जिनका नियमित अभ्यास करके आप अपनी किसी भी तरह की बवासीर से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकते हैं और पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

बवासीर के लिए बालासन योग

➢ बालासन करने से हमारे शरीर में रक्त का संचार बढ़ता है और पाचन शक्ति भी बढ़ती है साथ ही गैस, एसिडिटी, कब्ज जैसी परेशानियां भी दूर होती हैं।
➢ बालासन करने के लिए चटाई पर वज्रासन में बैठे।
➢ सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को आसमान की तरफ सीधा ऊपर उठाएं।
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➢ सांस छोड़ते हुए सामने की तरफ झुकना शुरू करें और अपने माथे को जमीन से लगा ले।
➢ अपने हाथों को सामने की तरफ सीधा फैलालें।
➢ इस स्थिति में सामान्य रूप से सांस लेते रहें और कुछ देर तक ऐसी स्थिति में बने रहे।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

बवासीर के लिए सर्वांगासन योग

➢ सर्वांगासन करने से हमारे शरीर के सभी अंगों की एक्सरसाइज होती है जिससे सभी अंगों को लाभ होता है।
➢ सर्वांगासन करने के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को एक साथ आसमान की तरफ सीधा ऊपर उठा लें।
➢ अपनी कमर को अपने दोनों हाथों से सहारा दें।
➢ आपके पैरों के अंगूठे आपकी आंखों की सीध में रहने चाहिए।
➢ इस स्थिति में सामान्य रूप से सांस लेते रहे।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

बवासीर के लिए पवनमुक्तासन योग

➢ पवनमुक्तासन करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है और पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे कि अपच, गैस और कब्ज़ से हमें छुटकारा मिलता है।
➢ पवनमुक्तासन बवासीर को जड़ से मिटाने में बहुत कारगर है।
➢ पवनमुक्तासन करने के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
➢ अब अपने सिर, कंधों और पैरों को एक साथ ऊपर उठाना शुरू करें।
➢ अपने पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए अपने सीने की तरफ लाएं।
➢ अब अपने दोनों पैरों को अपने हाथों से पकड़ लें।
➢ ऐसी स्थिति में सामान्य रूप से सांस लेना है।
➢ कुछ देर ऐसी स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाए।

बवासीर के लिए विपरीत करणी योगासन

➢ विपरीत करणी योगासन करने से रक्त का संचार सिर की तरफ बढ़ जाता है जिससे कमर के ऊपरी हिस्सों में पर्याप्त ऑक्सीजन पहुँचती है और मांसपेशियाँ मजबूत होती है।
➢ पाचन शक्ति बढ़ती है और पेट से जुड़ी बीमारियाँ जैसे कब्ज़, गैस, अपच, बबासीर से राहत मिलती है।
➢ विपरीत करणी योगासन करने के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
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➢ अब अपने पैरों को सीधा ऊपर की तरफ उठा ले।
➢ अपने पैरों को 90 डिग्री तक ऊपर उठाना है।
➢ शुरुआत में आप अपने पैरों को दीवार के सहारे से ऊपर उठाए रख सकते हैं।
➢ इस स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है फिर वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

बवासीर के लिए पादहस्तासन योग

➢ पादहस्तासन योग करने से शरीर में लचीलापन आता है और मांसपेशियां मजबूत होती है साथ ही यह आसन बवासीर के लिए भी फायदेमंद होता है।
➢ पादहस्तासन योग करने के लिए चटाई पर सीधे खड़े हो जाएं।
➢ सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को आसमान की तरफ सीधा ऊपर उठा ले।
➢ सांस छोड़ते हुए सामने की तरफ झुकना शुरू करें और अपने हाथों से अपने पैरों को छूने का प्रयास करें।
➢ अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए ही आपको सामने की तरफ झुकना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

बवासीर के लिए पश्चिमोत्तानासन योग

➢ पश्चिमोत्तानासन योग भी बवासीर में लाभदायक होता है क्योंकि इसे करने से हमारी पाचन शक्ति मजबूत होती है और पेट से जुड़ी बीमारियां भी ठीक होती हैं।
➢ पश्चिमोत्तानासन करने के लिए चटाई पर दंडासन में बैठ जाएं।
➢ अब सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर तक उठाएं।
➢ सांस छोड़ते हुए सामने की तरफ झुकना शुरू करें और अपने हाथों से अपने पैरों को छूने का प्रयास करें।
➢ सामने की तरफ झुकते समय रीढ़ की हड्डी को सीधा रखना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद सांस लेते हुए वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

बवासीर के लिए प्राणायाम

➢ प्राणायाम करने से भी बवासीर में लाभ होता है क्योंकि प्राणायाम करने से हमारे फेफड़े मजबूत होते हैं, हमारी पाचन शक्ति मजबूत होती है।
➢ बबासीर के लिए आप अनुलोम-विलोम प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, भस्त्रिका प्राणायाम कर सकते है।

बवासीर के लिए हलासन योग

➢ हलासन करने से हमारे शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, तनाव दूर होता है, पाचन शक्ति मजबूत होती है और पेट से जुड़ी बीमारियां जैसे की कब्ज, गैस, अपच की परेशानी भी हमेशा के लिए दूर होती है। जिससे बवासीर ठीक होता है।
➢ हलासन करने के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को एक साथ ऊपर उठाते हुए सिर के पीछे तक ले जाएं।
➢ अपने पैरों के घुटनों को सीधा रखें।
➢ अपनी कमर को अपने हाथों से सहारा दे।
➢ इस स्थिति में सामान्य रूप से सांस लेते रहे।
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➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

बवासीर के लिए पर्वतासन योग

➢ पर्वतासन करने से हमारे शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती है, पाचन शक्ति मजबूत होती है और यह आसन बवासीर के लिए भी फायदेमंद है।
➢ पर्वतासन करने के लिए चटाई पर पेट के बल लेट जाएं।
➢ अपने दोनों हाथों को अपने सीने के बगल में रख ले।
➢ अपने दोनों पैरों के बीच में थोड़ा सा अंतर बना ले।
➢ अब साँस ले और सांस छोड़ते हुए अपने नितंबों को जितना हो सके ऊपर उठाने का प्रयास करें।
➢ ऐसी स्थिति में आपके शरीर का पूरा वजन आपके हाथों और पैरों पर रहेगा।
➢ ऐसी स्थिति में आपको सांस रोके रखना है।
➢ फिर कुछ देर बाद सांस लेते हुए वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

क्या बवासीर में दूध पीना चाहिए?

बवासीर, शारीरिक दुर्बलता, ह्रदय रोग, निमोनिया, सामान्य बुखार, मानसिक रोग में दूध जरूर पीना चाहिए क्योंकि इन बीमारियों में हमारे शरीर में वात और पित्त बढ़ जाता है और दूध पीने से यह कम होता हैं इसीलिए बवासीर में भी दूध जरूर पीना चाहिए।

क्या बवासीर में घी खाना चाहिए?

बवासीर में घी और तेल का सेवन कम से कम करना चाहिए क्योंकि इनका अधिक सेवन करने से बवासीर की परेशानी बढ़ सकती है।

केले से बवासीर कैसे ठीक करें?

नियमित रूप से केले का सेवन करके बवासीर को काफी हद तक कम किया जा सकता है क्योंकि केला खाने से हमारा पाचन तंत्र मजबूत होता है जिससे कब्ज, गैस, अपच जैसी परेशानियां भी दूर होती हैं, साथ ही केले में फाइबर, एंटीबॉडीज,नेचुरल शुगर होती हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती हैं।

पाइल्स में क्या नहीं खाएं?

यदि किसी को पाइल्स या बवासीर की परेशानी है तो उसे मैंदा, जंक फूड, फास्ट फूड के सेवन से बचना चाहिए, पैकिंग वाली फूड का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, आइसक्रीम, पनीर, चीज, तेल, घी का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।

क्या बवासीर में हल्दी वाला दूध पी सकते हैं?

हल्दी गर्म तासीर की होती है और खून को पतला करती है इसलिए जिन लोगों की बॉडी गर्म रहती है या जिन्हें पाइल्स की परेशानी हो या नाक से खून आता हो उन्हें हल्दी का सेवन नहीं करना चाहिए इसलिए बवासीर में हल्दी वाला दूध नहीं पी सकते।

बवासीर में दही खा सकते हैं क्या?

दही खाने से कब्ज की परेशानी दूर होती है इसलिए दही बवासीर में लाभ पहुंचाता है।

बवासीर में गुड़ खा सकते हैं क्या?

गुड़ में निकोटिन, विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन B12, कैरोटीन, विटामिन सी, आयरन, फास्फोरस पाया जाता है जिससे यह बवासीर में लाभदायक होता है, इसीलिए बवासीर में गुड़ खा सकते हैं।

सारांश

बवासीर होने का प्रमुख कारण पाचन तंत्र की खराबी हैं। जब हमारी पाचन शक्ति अत्यधिक कमजोर हो जाती है और कब्ज, गैस, अपच अत्यधिक बढ़ जाता है तब बवासीर होने की संभावना रहती है इसलिए अपने पाचन को मजबूत बनाकर बवासीर को दूर किया जा सकता है।

अपने आहार में उन चीजों को शामिल करें जिन्हें हमारा पाचन तंत्र आसानी से पचा पाता है और जिससे हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, दूध, अंकुरित अनाज को अपने आहार में शामिल करें जो हमें ऊर्जा प्रदान करते हैं।

इसके साथ ही नियमित रूप से योग अभ्यास करें क्योंकि योग के जरिए हम अपनी बड़ी से बड़ी बीमारी को भी दूर कर सकते हैं और पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

कई सारी ऐसी चीजें होती हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक होती है जैसे कि शराब, सिगरेट, गुटका, तंबाकू हमें इनके सेवन से भी बचना चाहिए।

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