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योग द्वारा हर्निया का इलाज कैसे करें

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योग द्वारा हर्निया का इलाज कैसे करें

जब शरीर के किसी अंग में मांस बाहर निकलने लगता है और अनचाहा उभार आने लगता है तो इस स्थिति को हर्निया कहा जाता है। हर्निया में तेज दर्द होता है और तकलीफ होती है। हर्निया कम उम्र के बच्चों से लेकर बड़े लोगों तक में हो सकता है। हर्निया होने के प्रमुख कारण मोटापा, खांसी, सर्जरी, पेट में कब्ज का होना हो सकते हैं। कई बार हम हेल्दी डाइट लेते हैं, हेल्दी लाइफ़स्टाइल जीते हैं तब भी यह परेशानी हो सकती है।

आमतौर पर हर्निया की परेशानी पेट के आसपास के हिस्से में ही देखी जाती है लेकिन कई बार यह पेट के अलावा जांघो, शरीर के ऊपरी हिस्सों, नाभि पर, कमर में भी हो सकता है। हर्निया की वजह से जो उभार आता है उसमें वसायुक्त तरल पदार्थ का हिस्सा मौजूद रह सकता है। हर्निया ऐसी बीमारी है जो जन्मजात भी हो सकती है और जन्म के बाद भी हो सकती है।

हर्निया का उपचार कराने के लिए आमतौर पर ऑपरेशन करवाया जाता है, पर ऑपरेशन के बिना भी हर्निया का इलाज किया जा सकता है। हर्निया को ठीक करने के लिए नियमित रूप से योग करना एक प्राकृतिक तरीका है। यहां पर कुछ योगासन बताए जा रहे हैं जिनका अभ्यास करने पर हर्निया को ठीक किया जा सकता है। लेकिन इनका अभ्यास योग के विशेषज्ञों की सलाह पर या चिकित्सकों से सलाह लेने के बाद ही करें।

हर्निया की परेशानी होने पर कोई भी ऐसा योगासन ना करें जिसमें पीछे झुका जाता है।

बालासन योग द्वारा हर्निया का इलाज

➢ जब हम बालासन करते हैं तब सामने की तरफ झुकते हैं ऐसे में नाभि और पेट के हिस्से पर दबाव पड़ता है जिससे बाहर निकला हुआ हिस्सा आकार में कम होना शुरू हो जाता है।
➢ बालासन करने के लिए चटाई पर वज्रासन की स्थिति में बैठ जाएं।
➢ सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को सीधे ऊपर उठा ले।
➢ यह भी पढ़े: बाल उगाने के योग- बालों को घना और लम्बा बनाने के लिए
➢ सांस छोड़ते हुए सामने की तरफ झुकना शुरू करें और अपने माथे को जमीन से लगा ले।
➢ अपने हाथों को भी सामने जमीन पर फैलाले। अपने दोनों हाथों की कोहनियों को सीधा रखें।
➢ ऐसी स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

मंडूकासन योग द्वारा हर्निया का इलाज

➢ जब हम मंडूकासन योग करते हैं तब सामने की तरफ झुकना पड़ता है ऐसे में पेट और नाभि के हिस्से पर दबाव पड़ता है जिससे हर्निया रोग में लाभ होता है।
➢ मंडूकासन योग करने के लिए चटाई पर वज्रासन की स्थिति में बैठ जाएं।
➢ पैरों के पंजे अंदर की तरफ रहना चाहिए और एड़ियां बाहर निकली हुई होनी चाहिए।
➢ अब अपनी श्वास को पूरा बाहर निकाल दें।
➢ अपने दोनों हाथों से मुठ्ठियाँ बनाएं और उन्हें अपनी नाभि के पास रख ले।
➢ अब सामने की तरफ झुकना शुरू करें और पूरा सामने झुक जाए।
➢ आपको अपनी गर्दन को सीधा रखना है।
➢ सांस छोड़े हुए कुछ देर रुके रहे, इसके बाद सांस लें और फिर पुनः सांस को छोड़ दें।
➢ सांस छोड़ने के बाद 10 से 15 सेकंड तक रुके।
➢ इस तरह से 1 से 2 मिनट तक इस प्रक्रिया को दोहराएं फिर वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

ताड़ासन योग द्वारा हर्निया का इलाज

➢ ताड़ासन करने से भी हर्निया में लाभ होता है।
➢ ताड़ासन करने के लिए चटाई पर सीधे खड़े हो जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों के बीच में थोड़ा सा अंतर बना ले और अपने पैरों को सीधा रखें।
➢ अपनी रीढ़ की हड्डी को भी सीधा रखें।
➢ सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर उठाएं। हाथों की कोहनियाँ सीधी रहनी चाहिए।
➢ अपने हाथों को सिर के ऊपर तक उठा ले।
➢ अब अपने दोनों हाथों को आपस में मिला लें और अपने पूरे शरीर को ऊपर की तरफ खींचने का प्रयास करें।
➢ अपने शरीर को ऊपर की तरफ खींचते समय अपनी एड़ियों को भी ऊपर उठा ले और अपने शरीर का वजन अपने पैर के पंजों पर केंद्रित करें।
➢ कुछ सेकंड के लिए इस स्थिति में रुके फिर सांस छोड़ते हुए वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।
➢ यह ताड़ासन का एक चक्र पूरा हुआ।
➢ इस तरह से आप ताड़ासन के 10 से 15 चक्र करें।

तिर्यक ताड़ासन योग द्वारा हर्निया का इलाज

➢ तिर्यक ताड़ासन योग करने से भी हर्निया में लाभ होता है।
➢ तिर्यक ताड़ासन योग करने के लिए चटाई पर सावधान की स्थिति में खड़े हो जाएं।
➢ आपके दोनों पैर आपस में जुड़े रहने चाहिए।
➢ अपनी कमर को भी सीधा रखें।
➢ सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर की तरफ उठाना शुरू करें।
➢ हाथों की कोहनियाँ सीधी रहनी चाहिए।
➢ जब आपके हाथ कंधों की सीध में आ जाए तब अपनी हथेलियों को आसमान की दिशा में घुमाले और अपने हाथों को सीधा ऊपर ले जाते हुए अपने हाथों को आपस में मिलाले।
➢ अब अपने दोनों पैरों के बीच में एक से डेढ़ फुट का अंतर बना ले।
➢ सांस लेते हुए अपनी कमर को दाएं तरफ झुकाना शुरू करें।
➢ कुछ देर ऐसी स्थिति में रुके फिर सांस छोड़ते हुए अपनी कमर को सीधा करें।
➢ अब फिर से सांस लेते हुए अपनी कमर को बाएं तरफ झुकाना शुरू करें और सांस छोड़ते हुए वापस अपनी कमर को सीधा कर ले।
➢ इस प्रकार तिर्यक ताड़ासन के 10 से 12 चक्र करें।

मर्कटासन योग द्वारा हर्निया का इलाज

➢ मर्कट का अर्थ होता है बन्दर। इस आसन को करते समय हमारी आकृति बंदर की तरह दिखती है इसी कारण से इसे मर्कटासन कहा जाता है।
➢ मर्कटासन करने के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए पैर के पंजों को अपने शरीर के पास रख ले।
➢ यह भी पढ़े: साइनस के लिए योग- साइनस की परेशानी का अंत
➢ अब अपने दोनों हाथों को सीधा कर ले, अपने कंधों की सीध में।
➢ सांस लेते हुए अपने पैरों को दाएं तरफ घुमाले और अपने सिर को बाएं तरफ घुमा ले।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद फिर अपने पैरों और सिर को सीधा करलें।
➢ अब अपने पैर को बाएं तरफ घुमा ले और अपने सिर को दाये तरफ घुमाले।
➢ इस तरह इस प्रक्रिया को 10 से 12 बार दोहराएं।

पवनमुक्तासन योग द्वारा हर्निया का इलाज

➢ पवनमुक्तासन योग हर्निया में लाभदायक होता है।
➢ पवन मुक्त आसन करने के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
➢ अब अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए अपने घुटने छाती की तरफ लाएं।
➢ अपने सिर और कंधों को भी ऊपर उठाते हुए अपने घुटनों की तरफ आगे बढ़े।
➢ अपने हाथों से अपने पैरों के घुटनों को पकड़ ले।
➢ ऐसी स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

नौकासन योग द्वारा हर्निया का इलाज

➢ नौकासन योग करने से हर्निया में लाभ होता है।
➢ नौकासन योग करने के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
➢ अब अपने दोनों पैरों को एक साथ ऊपर उठाना शुरू करें। पैरों के घुटने सीधे रहने चाहिए।
➢ साथ ही अपने सिर, कंधे और पूरी पीठ को भी ऊपर उठा ले।
➢ ऐसी स्थिति में आपके शरीर का पूरा वजन आपके नितंबों पर रहना चाहिए।
➢ अपने हाथों को सीधा रखें, अपने पैरों के घुटनों की सीध में और आपकी नजरें पैरों के अंगूठे पर होनी चाहिए।
➢ इस स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

उत्तानासन योग द्वारा हर्निया का इलाज

➢ जब हम उत्तानासन योग करते हैं तब हमें सामने की तरफ झुकना पड़ता है जिससे हमारे पेट पर दबाव पड़ता है ऐसे में हर्निया में लाभ होता है।
➢ उत्तानासन योग करने के लिए चटाई पर सीधे खड़े हो जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों के बीच में थोड़ा सा अंतर बना ले।
➢ अपनी रीढ़ की हड्डी और कमर को सीधा रखें।
➢ सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को सीधा ऊपर उठा ले।
➢ सांस छोड़ते हुए सामने की तरफ कमर झुकाना शुरू करें और अपने हाथों से अपने पैरों के पंजों को छूने का प्रयास करें।
➢ कुछ सेकंड के लिए इस स्थिति में रुके फिर सांस लेते हुए वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।
➢ इस तरह से आप उत्तानासन के 10 से 12 चक्र कर सकते हैं।

वज्रासन योग द्वारा हर्निया का इलाज

➢ जब हम वज्रासन करते हैं तो हमारे पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और पेट की गैस, कब्ज, अपच जैसी परेशानी भी दूर होती है।
➢ वज्रासन करने के लिए चटाई पर दंडासन की स्थिति में बैठ जाएं।
➢ अब अपने दाएं पैर के पंजे को पकड़कर अपने दाएं नितंब के नीचे रखें और अपने बाएं पैर के पंजे को पकड़कर अपने बाएं नितंब के नीचे रखें।
➢ आपके पैर के पंजे अंदर की तरफ होने चाहिए और एड़ियां बाहर की तरफ होनी चाहिए।
➢ अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा करें, अपने सिर और गर्दन को भी सीधा रखें।
➢ अपने हाथों को अपने घुटनों पर रखें।
➢ ऐसी स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है और कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

विपरीत करणी योग द्वारा हर्निया का इलाज

➢ विपरीत करणी योग करने से भी हर्निया में लाभ होता है।
➢ विपरीत करणी योग करने के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
➢ यह भी पढ़े: सांस फूलने का योग- सांस की परेशानियों का प्राकृतिक उपचार
➢ अब अपने दोनों पैरों को एक साथ ऊपर की तरफ उठा ले और पैरों के घुटने सीधे रहने चाहिए।
➢ अब अपनी कमर को भी ऊपर उठा ले और अपने हाथों से अपनी कमर को सहारा दें।
➢ ऐसी स्थिति में आपका सिर, कंधे और पीठ पर आपके पूरे शरीर का वजन होना चाहिए।
➢ इस स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है और कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

आमतौर पर पूंछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब

क्या हर्निया बिना ऑपरेशन के ठीक हो सकता है?

नियमित रूप से योग करके हर्निया को ऑपरेशन के बिना भी ठीक किया जा सकता है। इसके लिए आप ऐसे आसन करें जिनमें सामने की तरफ झुका जाता है। पीछे की तरफ झुक कर किए जाने वाले आसन हर्निया होने पर नहीं करना चाहिए। आप पश्चिमोत्तानासन, पादहस्तासन, नौकासन, विपरीत करणी आसन, वज्रासन, पवनमुक्तासन, मर्कटासन, तिर्यक ताड़ासन, ताड़ासन, मंडूकासन, बालासन का अभ्यास कर सकते हैं।

हर्निया बीमारी में क्या होता है?

हर्निया बीमारी में पेट की मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं और उनके बीच में गैप आ जाता है जिससे आंते बाहर की तरफ आ जाती हैं और पेट पर अनचाहा उभार आ जाता है।

हर्निया से क्या तकलीफ होती है?

हर्निया होने पर शरीर का कोई अंग अपनी झिल्ली से बाहर निकल आता है ऐसे में मरीज को बहुत तकलीफ होती है। उल्टी आ सकती है, चलने फिरने में तकलीफ हो सकती है।

हर्निया से क्या नुकसान होता है?

हर्निया होने पर बहुत तकलीफ होती है, चलने-फिरने में दिक्कत होती है, उल्टी आ सकती है, ऐसे में पीड़ित की सामान्य दिनचर्या पूरी तरह बिगड़ जाती है जिससे उसके व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन पर प्रभाव पड़ता है, उसका व्यवसाय या कामकाज प्रभावित होता है।

हर्निया में कौन सा प्राणायाम करना चाहिए?

हर्निया होने पर आपको अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका प्राणायाम करना चाहिए।

हर्निया कितने प्रकार की होती है?

आमतौर पर हर्निया के तीन प्रकार होते हैं-

  1. वेक्षण हर्निया (इंग्वाइनल हर्निया)
  2. नाभि हर्निया (अंबिलाइकल हर्निया)
  3. जघनास्थिक हर्निया (फीमोरल हर्निया)

क्या हर्निया दवा से ठीक हो सकता है?

आमतौर पर हर्निया में पीड़ित को बहुत तकलीफ होती है लेकिन हर्निया जानलेवा नहीं होता है। हर्निया को ठीक करने के लिए ऑपरेशन करवाया जा सकता है और दवाइयों से भी हर्निया को ठीक किया जा सकता है।

सारांश

हर्निया होने पर पीड़ित को कई बार बहुत तकलीफ का सामना करना पड़ता है, लेकिन हर्निया जानलेवा बीमारी नहीं होती है। हर्निया होने पर हमारी दिनचर्या बहुत ज्यादा प्रभावित होती है क्योंकि इसमें तकलीफ होती है, चलने फिरने में परेशानी होती है, उल्टियां हो सकती हैं इसलिए हर्निया होने पर हमें कई बार बहुत नुकसान भी हो सकता है। हर्निया होने पर आमतौर पर ऑपरेशन करवाया जाता है या दवाइयों का सेवन किया जाता है। जब हम दवाइयों का सेवन करते हैं तो इससे हमें कुछ नुकसान भी हो सकता है इसीलिए हर्निया को ठीक करने के लिए योग सबसे अच्छा माध्यम है क्योंकि योग एक प्राकृतिक तरीका है। नियमित रूप से योग करके हर्निया को ठीक किया जा सकता है।

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