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सांस फूलने का योग- सांस की परेशानियों का प्राकृतिक उपचार

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सांस फूलने का योग- सांस की परेशानियों का प्राकृतिक उपचार

वर्तमान समय में हम ऐसी अनियमित दिनचर्या जी रहे हैं जिसमें हम अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, हमारे ऊपर अपने काम का दबाव अत्यधिक बढ़ गया है जिससे हम तनाव में रहते हैं, साथ ही प्रदूषण भी एक प्रमुख कारण है जिस वजह से सांस से जुड़ी परेशानियां या सांस फूलने की समस्याएं हो रही हैं। यदि सांस फूलने की परेशानी अत्यधिक बढ़ जाती है तो यह दमा या अस्थमा का रूप ले लेती है।

यदि हम समय रहते इस पर ध्यान देना शुरू कर दें तब हम दमा या अस्थमा जैसी बीमारी से बच सकते हैं। इससे बचने का सबसे सरल उपाय है योग। सांस फूलने का योग नियमित रूप से करने पर सांस फूलने की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी और यह परेशानी आगे बढ़ नहीं पाएगी। यहां पर हम कुछ योगासन बता रहे हैं जिनका नियमित अभ्यास आपकी सांस फूलने की परेशानी को हमेशा के लिए दूर कर देगा।

सांस फूलने का योग सर्वांगासन

➢ सर्वांगासन करने से सांस फूलने की परेशानी हमेशा के लिए दूर हो जाती है।
➢ सर्वांगासन करने के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
➢ यह भी पढ़े: किडनी के लिए योग- किडनी की सभी परेशानियों का अंत
➢ अपने दोनों पैरों को एक साथ आसमान की दिशा में ऊपर उठा ले।
➢ अपने दोनों पैरों के घुटनों को सीधा रखें।
➢ अपनी कमर को अपने हाथों से सहारा दे।
➢ ऐसी स्थिति में आपके पैर के अंगूठे आपकी आंखों की सीध में रहने चाहिए।
➢ इस स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

सांस फूलने का योग पर्वतासन

➢ पर्वतासन करने से भी सांस फूलने की परेशानी दूर होती है।
➢ पर्वतासन करने के लिए चटाई पर पेट के बल लेट जाएं।
➢ अपने दोनों हाथों को अपने सीने के बगल में रखें।
➢ अपने दोनों पैरों के बीच में लगभग 1 फुट का अंतर बना लें।
➢ अब साँस छोड़ते हुए अपने नितंबों को ऊपर की तरफ उठाना है।
➢ जितना संभव हो सके उतना ज्यादा अपने नितंबों को ऊपर उठाने का प्रयास करें।
➢ ऐसी स्थिति में आपकी नजरें आपकी नाभि पर रहनी चाहिए।
➢ कुछ देर ऐसी स्थिति में रुकने के बाद आपको वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

सांस फूलने का योग भुजंगासन

➢ भुजंगासन करने से भी फेफड़े मजबूत होते हैं और सांस फूलने की परेशानी दूर होती है।
➢ भुजंगासन करने के लिए चटाई पर पेट के बल लेट जाएं।
➢ अपने दोनों हाथों को अपने सीने के बगल में रखें।
➢ अपने दोनों पैरों के बीच में लगभग 1 से डेढ़ फुट का अंतर बना लें।
➢ अब सांस लेते हुए अपने धड़ को ऊपर की तरफ उठाना शुरू करें।
➢ आपको अपनी नाभि तक अपने धड़ को उठाना है।
➢ अपने सिर को जितना हो सके पीछे की तरफ रखने का प्रयास करें।
➢ इस स्थिति में हमारी आकृति सिर उठाए हुए सर्प की तरह होती है इसी कारण से इसे कोबरापोज के नाम से भी जाना जाता है।
➢ कुछ देर ऐसी स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

सांस फूलने का योग चक्रासन

➢ चक्रासन के नियमित अभ्यास से हमारे फेफड़े मजबूत होते हैं और सांस फूलने की परेशानी दूर होती है।
➢ चक्रासन करने के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
➢ अब अपने हाथों को अपने सिर के बगल में रख ले।
➢ अपने पैरों के पंजों को अपने नितंबों के पास रखें।
➢ अब आपको अपने शरीर को जमीन से ऊपर उठा लेना है।
➢ ऐसी स्थिति में आपके शरीर का पूरा वजन आपके हाथों और पैरों पर रहेगा।
➢ अपने सिर को जितना हो सके नीचे की तरफ रखने का प्रयास करें।
➢ ऐसी स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है और कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

सांस फूलने का योग शवासन

➢ जब हम शवासन करते हैं तब हमारे शरीर के सभी अंगों को आराम मिलता है।
➢ शवासन करने से सांस फूलने की परेशानी भी दूर होती है।
➢ शवासन करने के लिए चटाई पर पेट के बल लेट जाएं।
➢ यह भी पढ़े: कान के लिए योग- कान की सभी परेशानियों का आसान उपाये
➢ अपने दोनों पैरों के बीच में एक से डेढ़ फुट का अंतर बनाले।
➢ अपने हाथों को जमीन पर सीधा रखें।
➢ हाथों की कोहनियाँ सीधी रहनी चाहिए।
➢ अपने सिर को सीधा रखें और अपनी आंखों को बंद कर लें।
➢ ऐसी स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

सांस फूलने का योग धनुरासन

➢ धनुरासन करने से हमारे फेफड़े मजबूत होते हैं और सांस फूलने की परेशानी दूर होती है।
➢ धनुरासन करते समय हमारी आकृति खिंचे हुए धनुष के समान होती है इसी कारण इसे धनुरासन कहा जाता है।
➢ धनुरासन करने के लिए पेट के बल चटाई पर लेट जाएं।
➢ अब अपने पैरों के पंजों को अपने हाथों से पकड़ने का प्रयास करें।
➢ आपको अपने पैरों के पंजों को अपने सिर की तरफ खींचने का प्रयास करना है।
➢ ऐसी स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है और कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

सांस फूलने का योगा पवनमुक्तासन

➢ पवनमुक्तासन करने से भी हमारे फेफड़े मजबूत होते हैं और सांस फूलने की परेशानी दूर होती है।
➢ पवनमुक्तासन करने के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
➢ अब अपने दोनों पैरों को एक साथ घुटनों से मोड़ते हुए अपनी छाती की तरफ लाएं।
➢ अपने सिर और कंधों को ऊपर उठाते हुए अपने हाथों से अपने पैरों के घुटनों को पकड़ ले।
➢ इस स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है और कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

सांस फूलने का योग पश्चिमोत्तानासन

➢ जब हम पश्चिमोत्तानासन करते हैं तब हमारे फेफड़े मजबूत होते हैं और सांस फूलने की परेशानी भी दूर होती है।
➢ पश्चिमोत्तानासन करने के लिए चटाई पर दंडासन की स्थिति में बैठ जाएं।
➢ अब सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और सांस छोड़ते हुए सामने की तरफ झुकना शुरू करें।
➢ आपको अपने हाथों से अपने पैरों को छूने का प्रयास करना है।
➢ ऐसा करते समय आपके हाथों की कोहनियाँ सीधी रहनी चाहिए।
➢ कुछ देर ऐसी स्थिति में रुके फिर वापस सांस लेते हुए सामान्य स्थिति में आ जाएं।
➢ यह पश्चिमोत्तानासन का एक चक्र हुआ इस तरह से आप पश्चिमोत्तानासन के 12 से 15 चक्र कर सकते हैं।

सांस फूलने का योग पादहस्तासन

➢ पादहस्तासन करने से भी हमारे फेफड़े मजबूत होते हैं और सांस फूलने की परेशानी दूर होती है।
➢ पादहस्तासन करने के लिए चटाई पर सीधे खड़े हो जाएं।
➢ अब सांस लेते हुए अपने हाथों को आसमान की तरफ सीधा ऊपर उठा ले।
➢ सांस छोड़ते हुए सामने की तरफ झुकना शुरू करें।
➢ ऐसा करते समय आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी रहनी चाहिए।
➢ आपको अपने हाथों से अपने पैरों को छूने का प्रयास करना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।
➢ यह पादहस्तासन का एक चक्र हुआ इस तरह से आप पादहस्तासन के 12 से 15 चक्र कर सकते हैं।

सांस फूलने का योग दंडासन

➢ जब हम दंडासन करते हैं तब हमारे फेफड़े मजबूत होते हैं साथ ही रक्त का संचार भी सही तरह से होता है जिससे सांस फूलने की परेशानी दूर होती है।
➢ दंडासन करने के लिए चटाई पर बैठ जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को सामने की तरफ सीधा फैला लें।
➢ यह भी पढ़े: बवासीर के लिए योग- बवासीर का प्राकृतिक उपचार
➢ दोनों पैरों के घुटने सीधे रहने चाहिए।
➢ अपनी रीढ़ की हड्डी को भी सीधा रखें और अपने सिर को सीधा रखें।
➢ अपने हाथों को बगल में रख सकते हैं।
➢ ऐसी स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है और कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

अक्सर पूंछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब

सांस फूलने पर कौन सा प्राणायाम करें?

सांस फूलने की परेशानी होने पर आप अनुलोम-विलोम प्राणायाम कर सकते हैं। इसके साथ ही कुछ योगासन जैसे कि पादहस्तासन, पश्चिमोत्तानासन, सर्वांगासन, पर्वतासन, भुजंगासन, शवासन, दंडासन का भी नियमित अभ्यास करना चाहिए। यदि इन आसनों का नियमित अभ्यास किया जाता है तो सांस फूलने की परेशानी से जल्द आराम मिल जाता है।

सांस फूलने पर क्या करें घरेलू उपाय?

सांस फूलने पर आपको नियमित रूप से योग करना चाहिए क्योंकि योग एक प्राकृतिक और घरेलू तरीका होता है। इसके साथ ही आपको भाप लेनी चाहिए। भाप लेने से भी सांस फूलने की परेशानी दूर होती है। अपने आहार में अदरक, चुकंदर का सेवन करना चाहिए साथ ही सौंफ का सेवन करना भी सांस फूलने की परेशानी को दूर करने में मदद करता है।

सांस की प्रॉब्लम कैसे ठीक करें?

सांस की प्रॉब्लम होने पर आपको नियमित रूप से योग करना चाहिए। योग करने से सांस से जुड़ी सभी तरह की प्रॉब्लम को दूर किया जा सकता है।

सांस फूलने के क्या लक्षण होते हैं?

सांस फूलने के प्रमुख लक्षणों में बुखार, खांसी, छाती में दर्द, धड़कन तेज होना, ब्लड प्रेशर कम होना आते है।

अस्थमा का परमानेंट इलाज क्या है?

नियमित रूप से योग करना अस्थमा का परमानेंट इलाज होता है।

सारांश

वर्तमान समय में हम जिस तरह की दिनचर्या जी रहे हैं ऐसे में हम अपने स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख रहे हैं, हमारे ऊपर काम का दबाव इतना ज्यादा होता है कि हम तनाव या अवसाद की स्थिति में आ जाते हैं, साथ ही पर्यावरण प्रदूषण भी एक बड़ा कारण है जिस वजह से सांस से जुड़ी परेशानियां बढ़ रही हैं। ऐसे में यदि हम नियमित रूप से योग करना शुरू कर दें तो हम सांस की बीमारी को बढ़ने से पहले ही रोक सकते हैं। यदि यह बीमारी ज्यादा बढ़ जाती है तो यह दमा या अस्थमा का रूप ले सकती है। जब हम बीमार होते हैं ऐसे में हमारी कार्यक्षमता कम हो जाती है जिसका असर हमारे जीवन पर पड़ता है इसलिए यह ज्यादा बेहतर है कि बीमारी होने से पहले ही हम उससे बचने के उपाय शुरू कर दें।

योग करने के साथ अपने आहार में भी परिवर्तन लाना जरूरी है। अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, दूध, अंकुरित अनाज को शामिल करें जो हमें शक्ति प्रदान करते हैं। साथ ही स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाली चीजें जैसे कि शराब, सिगरेट, गुटखा इनके सेवन से हमें हमेशा बचना चाहिए। यदि इन बातों का ध्यान रखा जाता है तो सांस से जुड़ी परेशानियों को बहुत आसानी से दूर किया जा सकता है।

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