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मानसिक रोग के लिए योग

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मानसिक रोग के लिए योग

आज के समय में लोगों की महत्वकांक्षा इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि वे उन्हें पूरा करने के लिए रात-दिन काम में लगे रहते हैं और काम का दबाव इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि वह आगे चलकर अवसाद या तनाव का रूप ले लेता है। जब यह अवसाद या तनाव अत्यधिक बढ़ जाता है तब लोग इससे छुटकारा पाने के लिए आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगते हैं।

जब कोई व्यक्ति अवसाद या तनाव का शिकार हो जाता है तब उसमें कुछ सामान्य लक्षण दिखाई देने लगते हैं जैसे की चिड़चिड़ाहट, परिवार व मित्रों से दूर रहना, खाना खाने की इच्छा ना होना, थकान महसूस करना, काम के प्रति विरक्ति की भावना। जब यही परेशानी और आगे बढ़ती है तब वह अनिद्रा, हाई ब्लड प्रेशर, सिर में दर्द, कब्ज, यौन शिथिलता जैसी बीमारियों का रूप भी ले लेती है। इन सब परेशानियों और मानसिक रोगों से बचने का सबसे कारगर उपाय नियमित रूप से योग करना है। योग के जरिए सभी प्रकार के मानसिक रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है।

मानसिक रोगों की यह परेशानी किसी एक देश अकेले में नहीं है बल्कि पूरी दुनिया में इस परेशानी को देखा जा रहा है। इसीलिए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरूकता और संवेदनशीलता लाने के उद्देश्य से 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।

यहां पर कुछ योगासन बताए जा रहे हैं जिनका नियमित अभ्यास आपको सभी प्रकार के मानसिक तनाव और मानसिक रोगों से छुटकारा दिलाएगा।

मानसिक रोग के लिए योग वीरभद्रासन

➢ वीरभद्रासन को योद्धा मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है।
➢ वीरभद्रासन करने से हमारा शरीर लचीला और मजबूत बनता है साथ ही हमारी मानसिक क्षमता का भी विकास होता है।
➢ वीरभद्रासन करने के लिए चटाई पर सीधे खड़े हो जाएं।
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➢ अब अपने दोनों पैरों को एक दूसरे से दूर फैला लें।
➢ दोनों पैरों के बीच में 3 से 4 फुट का अंतर होना चाहिए।
➢ अब अपने दोनों हाथों को कंधे के समानांतर फैला लें।
➢ हाथों की हथेलियां जमीन की तरफ रहनी चाहिए।
➢ अपने दाहिने पैर के पंजे को दाहिने तरफ घुमा ले और अपने सिर को भी दाहिने तरफ घुमा ले।
➢ इस स्थिति में अब धीरे-धीरे दाहिने घुटने को मोड़ कर थोड़ा नीचे हो जाएं।
➢ ऐसी स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है और कुछ देर बाद वापस पहली स्थिति में आ जाना है।
➢ इसके बाद यही प्रक्रिया बाई तरफ से भी आपको दौहरानी है।

मानसिक रोग के लिए योग गरुड़ासन

➢ गरुड़ासन को ईगल मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है।
➢ इसके अभ्यास से शरीर का संतुलन बनाने में सहायता मिलती है साथ ही ध्यान केंद्रित करने में भी यह आसन मदद करता है।
➢ गरुड़ासन योग करने के लिए सीधे खड़े हो जाइए।
➢ अब अपने बाएं पैर को ऊपर उठाएं और इसे दाएं पैर के ऊपर से ले जाकर दाहिने पैर में लपेट ले।
➢ इसी तरह से अपने हाथों को सामने लेकर आइए और बाएं हाथ को दाएं हाथ के सामने से घुमाके आपस में लपेट लें।
➢ इस स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।
➢ इसके बाद यही प्रक्रिया बाई तरफ से भी दुहराना है।

मानसिक रोग के लिए योग वज्रासन

➢ वज्रासन को करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।
➢ वज्र का अर्थ होता है आकाश में गरजने वाली बिजली।
➢ वज्रासन करने के लिए चटाई पर बैठ जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को सामने की तरफ सीधा फैला लें।
➢ दोनों पैरों के घुटने आपस में मिले हुए होने चाहिए।
➢ अब आपको अपने दाहिने पैर के पंजे को पकड़कर घुटनों से मोड़ते हुए अपने दाएं हिप के नीचे रखना है।
➢ इसी प्रकार से अपने बाएं पैर के पंजे को पकड़कर बाई हिप के नीचे पैर के पंजे को रखना है।
➢ आपके पैरों की एड़ियां बाहर की तरफ होनी चाहिए और पंजे अंदर की तरफ रहने चाहिए।
➢ अपनी कमर को भी सीधा रखें और गर्दन को भी सीधा रखें।
➢ अपने हाथों को घुटनों के ऊपर रख लें और हाथों की कोहनियों को भी सीधा रखें।
➢ ऐसी स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद अपने दाहिने पैर को धीरे से सीधा कर लेना है।
➢ इसके बाद बाएं पैर को भी धीरे से सीधा कर लेना है।

मानसिक रोग के लिए योग धनुरासन

➢ धनुरासन करने से हमारी मानसिक क्षमता का विकास होता है और यह आसन मानसिक रोगों में भी लाभदायक होता है।
➢ धनुरासन करने के लिए चटाई पर पेट के बल लेट जाएं।
➢ अब अपने पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए पैरों के पंजों को अपनी कमर के पास लाएं।
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➢ अपने हाथों से अपने पैरों के पंजों को पकड़ लें।
➢ अपने शरीर को खींचने का प्रयास करें और अपनी कमर को सीधा रखें।
➢ अपने हाथों की कोहनियों को भी सीधा रखें।
➢ ऐसी स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर ऐसी स्थिति में रुके फिर वापस सामान्य स्थिति में आ जाए।

मानसिक रोग के लिए योग सुखासन

➢ सुखासन करने से मन शांत रहता है और हमारी एकाग्रता बढ़ती है साथ ही हमारी स्मरण शक्ति भी बढ़ती है।
➢ सुखासन करने के लिए चटाई पर बैठ जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को सामने की तरफ फैला लें।
➢ अब अपने दोनों पैरों से पालथी मारकर बैठ जाएं।
➢ अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।
➢ अपनी गर्दन को भी सीधा रखें।
➢ अपने हाथों से ज्ञान मुद्रा बना लें और उन्हें अपने घुटनों पर रख ले।
➢ अब अपनी आंखों को बंद कर लें और ऐसी स्थिति में ध्यान करें।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

मानसिक रोग के लिए बालासन योग

➢ बालासन करने से मन शांत रहता है, एकाग्रता बढ़ती है और यह मानसिक रोगों में भी लाभ पहुंचाता है।
➢ बालासन करने के लिए चटाई पर वज्रासन में बैठ जाएं।
➢ सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर तक ले जाएं।
➢ सांस छोड़ते हुए सामने की तरफ कमर को झुकाना शुरू करें और अपने माथे को जमीन से लगा ले।
➢ अपने हाथों को भी सीधा जमीन पर फैला लें।
➢ इस स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

मानसिक रोग के लिए योग मत्स्यासन

➢ मत्स्यासन करने से रक्त का संचार सिर की तरफ बढ़ जाता है जिससे मानसिक क्षमता बढ़ती है, एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक रोग में लाभ होता है।
➢ मत्स्यासन करने के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
➢ अब अपने दोनों पैरों से पद्मासन लगा लें और अपने पैरों के घुटनों को जमीन से लगा ले।
➢ अपने हाथों की कोहनियों को जमीन पर रखें और कोहनियों से सहारा बनाकर अपने सिर को ऊपर उठा ले।
➢ सिर को ऊपर उठाने के बाद सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन से लगाले।
➢ अब अपने हाथों से अपने पैरों के अंगूठे को पकड़े।
➢ ऐसी स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

मानसिक रोग के लिए योग शवासन

➢ शवासन करने से हमारा पूरा शरीर आराम की स्थिति में आ जाता है जिससे मन भी शांत रहता है, एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक क्षमता का विकास होता है।
➢ शवासन का अभ्यास करने के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को एक दूसरे से दूरी पर रखें।
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➢ अपने हाथों को कमर के बाजू में फैलालें।
➢ हाथों को भी अपनी कमर से दूर रखें।
➢ हाथों की कोहनियाँ सीधी होनी चाहिए।
➢ अपनी गर्दन को भी सीधा बनाए रखें।
➢ इस स्थिति में सामान्य रूप से सांस लेते रहे और कुछ देर विश्राम करें।
➢ शवासन योगाभ्यास के अंत में किया जाने वाला आसन होता है।

आमतौर पर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब

मानसिक बीमारी को ठीक कैसे करें?

मानसिक बीमारी को ठीक करने के लिए नियमित रूप से योग अभ्यास करना चाहिए। योग में कई ऐसे आसन होते हैं जो हमारी मानसिक क्षमता को बढ़ाते हैं, एकाग्रता को बढ़ाते हैं जिससे हमें मानसिक बीमारी में लाभ होता है। इसके साथ ही अपने आहार में ड्राई फ्रूट्स को शामिल करें जिससे हमें एनर्जी मिलती है और हमारा दिमाग तेज होता है। साथ ही आपको कुछ ऐसे कार्य भी करना चाहिए जो आपको सुकून देते हैं जैसे कि दूसरों की मदद करना या कोई खेल जो आपको पसंद हो जैसे कि स्विमिंग करना, क्रिकेट खेलना, फुटबॉल खेलना जिससे आपको मानसिक शांति मिले और ये खेल स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होते हैं।

कौन से प्राणायाम से मन एकाग्र होता है और मानसिक शांति मिलती है?

कपालभाति, अनुलोम-विलोम, नाड़ी शोधन प्राणायाम, भस्त्रिका प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, उज्जायी प्राणायाम के अभ्यास से तनाव दूर होता है, आध्यात्मिक शक्ति जागृत होती है. मन एकाग्र होता है और मानसिक शांति मिलती है।

मानसिक रोग का आयुर्वेदिक इलाज क्या है?

मानसिक रोग होने पर ब्राह्मी, स्वर्ण भस्म, मंडूक पुष्पी का सेवन करना चाहिए। इनका सेवन करने से मानसिक क्षमता बढ़ती है और मन शांत रहता है इसके साथ ही अपने आहार में हल्का और सुपाच्य भोजन शामिल करना चाहिए। ड्राई फ्रूट्स और फलों को शामिल करना चाहिए। दही और खट्टे पदार्थ, मांसाहारी भोजन के सेवन से बचना चाहिए।

मानसिक रोग में क्या खाएं?

मानसिक रोग होने पर अपने आहार में ओमेगा 3 फैटी एसिड को शामिल करना चाहिए। इसके लिए अपने आहार में सोयाबीन तेल, पत्तेदार हरी सब्जियां, अलसी के बीज शामिल करें इसके साथ ही एंटीऑक्सीडेंट और अच्छे कार्ब्स को भी अपने आहार में जोड़ना चाहिए। विटामिन ए, विटामिन सी और विटामिन ई में एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं इसलिए ऐसे फलों और सब्जियों को अपने आहार में शामिल करें जिनमें ये विटामिन पाए जाते हैं।

सारांश

आज के समय में मानसिक रोग होना आम बात होती जा रही है। लोगों के ऊपर इतना दबाव आ रहा है कि वे जल्द ही तनाव या अवसाद के शिकार हो जाते हैं। जब यही तनाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तब कई लोग तो आत्महत्या करने पर भी विचार करने लगते हैं। इसीलिए मानसिक रोगों का सही समय पर उपचार होना जरूरी होता है। इसके लिए नियमित रूप से योग करना सबसे कारगर तरीका है।

योग करने से हमारा मन शांत रहता है, एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक क्षमता का विकास होता है जिससे किसी भी प्रकार के मानसिक रोग से बचा जा सकता है। योग करने के साथ ही हमें अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, दूध, अंकुरित अनाज को शामिल करना चाहिए जिनसे हमें ओमेगा 3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं जो मस्तिष्क की क्षमता को बढ़ाने के लिए कारगर साबित होते हैं।

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