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पद्मासन योग क्या है-पद्मासन योग के लाभ

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पद्मासन योग क्या है-पद्मासन योग के लाभ

पद्मासन को कमल आसन के नाम से भी जाना जाता है। इस आसन को करते समय घुटने विपरीत दिशा में रहने चाहिए। पद्मासन करने से मन शांत रहता है व ध्यान लगाने में यह आसन सहायक होता है। पद्मासन के नियमित अभ्यास से मन शांत रहता है, मांसपेशियों का तनाव दूर होता है, पाचन शक्ति मजबूत होती है और रक्तचाप नियंत्रित रहता है।

पद्मासन की विधि

➢ पद्मासन करने के लिए चटाई पर बैठ जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को सामने की तरफ फैला लें और घुटनों को सीधा रखें।
➢ अब अपने दाएं पैर के पंजे को पकड़कर बाएं जांघ के ऊपर रखें।
➢ यह भी पढ़े: वज्रासन कैसे करते हैं-वज्रासन के फायदे और नुकसान
➢ आपके दाएं पैर की एड़ी पेट से लगी हुई होनी चाहिए और दाएं पैर का तलवा आसमान की तरफ रहना चाहिए।
➢ इसी प्रकार से अब अपने बाएं पैर के पंजे को पकड़ कर दाएं जांघ के ऊपर रखें।
➢ बाय पैर की एड़ी पेट से लगी हुई होनी चाहिए और बाएं पैर का तलवा आसमान की तरफ रहना चाहिए।
➢ आपको अपने सिर और रीढ़ की हड्डी को भी सीधा रखना है।
➢ अपने हाथों से ज्ञान मुद्रा बना लें।
➢ ऐसी स्थिति में आपको कुछ देर ध्यान करना है।
➢ इस स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

पद्मासन योग के लाभ

➢ पद्मासन योग के नियमित अभ्यास से पाचन क्रिया सुचारु रुप से होती है और पेट से जुड़ी बीमारियां जैसे कि कब्ज, अपच और गैस की परेशानी भी दूर होती है।
➢ पद्मासन योग करने से महिलाओं की मासिक चक्र से जुड़ी परेशानियां भी दूर होती हैं।
➢ जो महिलाएं पद्मासन योग नियमित रूप से करती हैं गर्भावस्था में उनका प्रसव आसानी से होता है।
➢ पद्मासन के नियमित अभ्यास से मन शांत रहता है और चिंता, तनाव दूर होते हैं।
➢ इस आसन के अभ्यास से मांसपेशियों की अकड़न भी दूर होती है।
➢ पद्मासन योग के नियमित अभ्यास से घुटनों में एक द्रव्य का रिसाव होने लगता है जो अर्थराइटिस और घुटनों के दर्द से हमें बचाता है।
➢ इस आसन के अभ्यास से अवसाद दूर होता है और मन शांत रहता है जिससे अच्छी नींद आती है इस लिए जिन्हें अनिद्रा की परेशानी है उन्हें भी नियमित रूप से पद्मासन योग का अभ्यास करना चाहिए।
➢ पद्मासन योग के नियमित अभ्यास से हमारे शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ जाता है जिससे आप अपने किसी भी कार्य को बिना थके हुए कर सकते हैं।
➢ पद्मासन के नियमित अभ्यास से स्मरण शक्ति बढ़ती है और एकाग्रता की बढ़ती है।
➢ कमर में दर्द होने पर इस आसन को करने से कमर दर्द दूर होता है।
➢ पद्मासन योग करने से हमारी शारीरिक शक्ति भी बढ़ती है।

पद्मासन योग की सावधानियां

➢ पद्मासन योग करते समय आपका पेट खाली रहना चाहिए।
➢ यह आसन हमेशा सुबह के समय ही किया जाता है यदि आप इसे शाम को करना चाहते हैं तो खाना खाने के 3 से 4 घंटे बाद इसका अभ्यास करें।
➢ यह भी पढ़े: पेट साफ करने के लिए योग- कब्ज, गैस, अपच का इलाज
➢ महिलाओं को गर्भावस्था में योग के विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद या उनकी देखरेख में ही योगाभ्यास करना चाहिए।
➢ पैर में, एड़ियों में कोई चोट होने पर इसका अभ्यास करने से बचना चाहिए।
➢ कोई गंभीर बीमारी होने पर, ऑपरेशन होने के तुरंत बाद भी योगाभ्यास से बचना चाहिए।

आमतौर पर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब

पद्मासन के लिए कौन सी मुद्रा महत्वपूर्ण है?

पद्मासन योग करते समय आप ज्ञान मुद्रा में बैठ सकते हैं। इसके अलावा आप शांति मुद्रा, लिंग मुद्रा, अपान मुद्रा, शंख मुद्रा का भी अभ्यास कर सकते हैं।

पद्मासन कितनी देर तक करना चाहिए?

शुरुआत में आपको पद्मासन का अभ्यास 1 से 2 मिनट करना चाहिए। धीरे-धीरे इसके समय को आप 20 से 30 मिनट तक बढ़ा सकते हैं।

शुरुआत में पद्मासन का अभ्यास कैसे करना चाहिए?

यदि आपने अभी-अभी पद्मासन का अभ्यास करना शुरू किया है और आप अपने दोनों पैरों से पद्मासन नहीं लगा पा रहे हैं तो आपको शुरुआत में अर्ध पद्मासन का अभ्यास करना चाहिए। इसका अभ्यास पद्मासन की अपेक्षा आसान होता है। जब अर्ध पद्मासन का अभ्यास करने से आपके शरीर में लचीलापन आ जाए तब आपको पद्मासन का अभ्यास करना चाहिए।

सारांश

पद्मासन के नियमित अभ्यास से हमें अनेकों लाभ प्राप्त होते हैं। हमारा शरीर आंतरिक एवं बाहरी रूप से मजबूत बनता है, हमारी एकाग्रता बढ़ती है, अवसाद या तनाव दूर होता है और हमें अच्छी नींद आती है। पद्मासन का अभ्यास कई सारे योगी गहन ध्यान में जाने के लिए और कुंडली जागरण के लिए भी करते हैं। पद्मासन का अभ्यास करते समय हमें कुछ सावधानियों का भी ध्यान रखना चाहिए जैसे कि एड़ी में या घुटनों में दर्द हो, कोई चोट लगी हो तब इसका अभ्यास ना करें या कोई गंभीर बीमारी हो तब पद्मासन का अभ्यास ना करें।

पद्मासन करने से हमें फायदा होता है पर इसके साथ हमारे लिए यह भी जरूरी होता है कि हम अपने आहार में भी सुधार करें और संतुलित आहार लें। साथ ही हमें नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थ जैसे कि शराब, सिगरेट, गुटखा इनके सेवन से भी बचना चाहिए। यदि इन बातों को ध्यान में रखकर योग का अभ्यास किया जाता है तो हमें योग का अधिकतम लाभ प्राप्त होता है।

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