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पैंक्रियास के लिए योग

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पैंक्रियास के लिए योग

हमारी पाचन प्रणाली में पैंक्रियास का महत्वपूर्ण स्थान होता है। पैंक्रियास एक ग्रंथि होती है जिसे हम अमाशय के नाम से भी जानते हैं। यदि पैंक्रियास सही तरीके से कार्य ना करे तो पेट में दर्द, डायबिटीज, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। इसीलिए पैंक्रियास या अमाशय को स्वस्थ बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। इसे स्वस्थ बनाए रखने के लिए यहां पर हम आपको कुछ योगासन बता रहे हैं जिनके नियमित अभ्यास से आप अपने पैंक्रियास को स्वस्थ बनाए रख सकते हैं।

पैंक्रियास के लिए योग पश्चिमोत्तानासन

➢ पश्चिमोत्तानासन करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है और यह आसन पैंक्रियास के लिए भी लाभदायक होता है।
➢ पश्चिमोत्तानासन करने के लिए चटाई पर बैठ जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को सामने की तरफ फैला लें और घुटनों को सीधा रखें।
➢ यह भी पढ़े: पद्मासन योग क्या है-पद्मासन योग के लाभ
➢ अपने सिर और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।
➢ अब आपको सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर तक उठाना है।
➢ हाथों की कोहनियाँ सीधा रखें।
➢ सांस छोड़ते हुए सामने की तरफ झुकना शुरू करें और अपने हाथों से अपने पैरों को छूने का प्रयास करें।
➢ इस स्थिति में आपको कुछ सेकेंड के लिए रुकना है फिर सांस लेते हुए वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।
➢ इस तरह से आपको पश्चिमोत्तानासन के 12 से 15 चक्र करना है।

पैंक्रियास के लिए सर्वांगासन योग

➢ सर्वांगासन शरीर के सभी अंगों के लिए लाभदायक होता है।
➢ इसके अभ्यास से हमारी पाचन शक्ति भी मजबूत होती है और अमाशय भी स्वस्थ रहता है।
➢ सर्वांगासन करने के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को आसमान की तरफ सीधा ऊपर उठा ले। आपके पैरों के घुटने सीधे रहने चाहिए।
➢ अपनी कमर को अपने हाथों से सहारा दें।
➢ पैरों के अंगूठे आपकी आंखों की सीध में रहने चाहिए।
➢ ऐसी स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

पैंक्रियास के लिए हलासन योग

➢ हलासन करने से भी हमारी पाचन शक्ति मजबूत होती है और पैंक्रियास में लाभ होता है।
➢ हलासन करने के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को आपस में एक-दूसरे से लगा ले और उन्हें उठाकर अपने सिर के पीछे रख ले।
➢ अपनी कमर को अपने हाथों से सहारा दें।
➢ अपनी गर्दन को सीधा रखें।
➢ इस स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

पैंक्रियास के लिए योग शीर्षासन

➢ शीर्षासन के नियमित अभ्यास से भी हमारी पाचन शक्ति मजबूत होती है और पैंक्रियास में लाभ होता है।
➢ शीर्षासन योग करने के लिए चटाई पर घुटनों के बल बैठ जाएं।
➢ अपने हाथों की हथेलियों को आपस में मिला लें और उन्हें सामने की तरफ जमीन पर रख ले।
➢ अपने सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन पर रखें और अपनी हथेलियों से अपने सिर को सहारा दे।
➢ यह भी पढ़े: वज्रासन कैसे करते हैं-वज्रासन के फायदे और नुकसान
➢ अब अपने सिर के बल खड़े हो जाएं।
➢ शीर्षासन करते समय सामान्य रूप से सांस लेते रहें और कुछ देर बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

पैंक्रियास के लिए योग गोमुखासन

➢ गोमुखासन के अभ्यास से हमारी पाचन शक्ति मजबूत होती है और पैंक्रियास भी स्वस्थ रहता है।
➢ गोमुखासन करने के लिए चटाई पर दंडासन में बैठ जाएं।
➢ अब अपने बाएं पैर के पंजे को पकड़कर दाएं जांघ के नीचे रख ले।
➢ अपने दाएं पैर के पंजे को पकड़कर बाईं जांघ के बाजू में रखें।
➢ इस स्थिति में आपके बाएं पैर का घुटना दाएं घुटने के एकदम नीचे रहना चाहिए।
➢ अब आपको अपने दाहिने हाथ को सिर के बगल से पीछे ले जाना है और अपने बाएं हाथ को कमर के पीछे ले जाना है और दोनों हाथों को आपस में मिला लेना है।
➢ ऐसी स्थिति में आपको अपनी रीढ़ की हड्डी और सिर को सीधा रखना है और सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।
➢ गोमुखासन को अभी आपने दाएं तरफ से किया अब यही प्रक्रिया बाएं तरफ से दौहरानी है।
➢ जितनी देर आपने दाएं तरफ से गोमुखासन किया है उतना ही आपको बाएं तरफ से भी करना है।

पैंक्रियास के लिए योग अर्धमत्स्येंद्रासन

➢ अर्धमत्स्येंद्रासन करने के लिए चटाई पर बैठ जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को सामने की तरफ सीधा फैला लें।
➢ अब अपने बाएं पैर के पंजे को पकड़कर दाहिनी हिप के नीचे रख लें।
➢ बाएं पैर के घुटने को भी जमीन से लगा ले।
➢ दाहिने पैर के पंजे को पकड़कर बाएं घुटने के बाएं तरफ रख ले।
➢ अपने दाहिने हाथ को कमर के पीछे ले जाए और उसे पीछे ही रहने दे।
➢ बाएं हाथ की कोहनी को दाएं घुटने के दाएं तरफ लगा ले और अपने बाएं हाथ से दाएं पैर के अंगूठे को पकड़ ले।
➢ अब अपनी गर्दन को भी दाएं तरफ घुमा लें।
➢ जितनी देर आप इस स्थिति में रुकते हैं उतनी ही देर आपको सामान्य गति से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।
➢ यह दाहिने तरफ से अर्धमत्स्येंद्रासन हुआ।
➢ इसी तरह से आपको बाई तरफ से भी अर्धमत्स्येंद्रासन का अभ्यास करना है।

सारांश

पैंक्रियास या आमाशय पाचन प्रणाली की महत्वपूर्ण ग्रंथि होती है इसीलिए इसका स्वस्थ रहना बहुत जरूरी होता है। अगर पैंक्रियास स्वस्थ नहीं रहता तो कई गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है साथ ही हमारा पाचन भी खराब हो जाता है। पैंक्रियास को स्वस्थ बनाने के लिए योग सबसे अच्छा माध्यम है। योग के नियमित अभ्यास से पैंक्रियास को स्वस्थ बनाया जा सकता है। योग करने के साथ यह भी जरूरी होता है कि हम अच्छा भोजन करें जो हमारे शरीर को पोषण और ऊर्जा प्रदान करें। अगर हम जंक फूड, फास्ट फूड, तली-भुनी चीजें, शराब, सिगरेट, तंबाकू का सेवन करते हैं तो इनसे हमारे स्वास्थ्य को नुकसान होता है जो आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है।

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