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प्रोस्टेट के लिए योग

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प्रोस्टेट के लिए योग

प्रोस्टेट पुरुषों में पाई जाने वाली एक ग्रंथि होती है जो स्पर्म की मात्रा और गुणवत्ता को निर्धारित करती है, इसके साथ ही यह जननांगों में पीएच की मात्रा को भी कंट्रोल करती है। प्रोस्टेट का सामान्य वजन 20 ग्राम होता है लेकिन यह कई कारणों से बढ़कर 50 से 100 ग्राम तक हो जाता है। प्रोस्टेट में गड़बड़ी आने पर कैंसर, इनफर्टिलिटी का खतरा रहता है साथ ही बार-बार पेशाब आती है। प्रोस्टेट का आकार ज्यादा बढ़ जाने पर पेशाब करने के मार्ग में ब्लॉकेज आ जाते हैं जिस वजह से पेशाब करने में परेशानी होती है और किडनी से संबंधित रोग होने की संभावना भी बढ़ जाती है। प्रोस्टेट के बढ़ने के प्रमुख कारणों में खराब लाइफ़स्टाइल और अनुवांशिकी समस्याएं आती हैं।

प्रोस्टेट के लिए योगमुद्रासन

➢ योगमुद्रासन करने से पेट पर दबाव पड़ता है जिससे पाचन तंत्र और शरीर के अंदरूनी अंग सही तरीके से कार्य करते हैं साथ ही यह प्रोस्टेट के लिए भी लाभदायक होता है।
➢ योगमुद्रासन करने के लिए चटाई पर पद्मासन में बैठ जाएं।
➢ अब अपने दाहिने हाथ को अपने पेट पर रख ले।
➢ अपने दाहिने हाथ के ऊपर अपने बाएं हाथ को रख लें।
➢ यह भी पढ़े: पैंक्रियास के लिए योग
➢ अब गहरी सांस लें और सांस छोड़ते हुए अपने हाथों से अपने पेट को दबाते जाएं और सामने की तरफ झुकते जाएं।
➢ आपको तब तक सामने की तरफ झुकना है जब तक आपका माथा जमीन से ना लग जाए।
➢ इस स्थिति में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

प्रोस्टेट के लिए योग अर्धमत्स्येंद्रासन

➢ अर्धमत्स्येंद्रासन करने से प्रोस्टेट में लाभ होता है साथ ही यह आसन पाचन तंत्र को ठीक करता है, लिवर और किडनी की परेशानियों को भी दूर करता है।
➢ अर्धमत्स्येंद्रासन करने के लिए चटाई पर बैठ जाएं।
➢ अपने बाय पैर के पंजे को पकड़कर अपने दाएं पैर के नीचे रख ले।
➢ अपने दाएं पैर के पंजे को बाय घुटने के बाएं तरफ रख ले।
➢ अपने बाएं हाथ की कोहनी को दाएं घुटने के दाएं तरफ लगा ले और अपने बाएं हाथ से दाएं पैर के अंगूठे को पकड़ ले।
➢ अपने दाहिने हाथ को अपनी कमर के पीछे रख ले और अपने सिर को दाहिनी तरफ घुमा ले।
➢ यह दाहिने तरफ से अर्धमत्स्येंद्रासन हुआ इसी तरह से आपको बाई तरफ से अर्धमत्स्येंद्रासन का अभ्यास करना है।

प्रोस्टेट के लिए गोमुखासन योग

➢ गोमुखासन योग करने से भी पाचन शक्ति में लाभ होता है और यह प्रोस्टेट के लिए भी लाभदायक होता है।
➢ गोमुखासन योग करने के लिए चटाई पर बैठ जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को सामने की तरफ सीधा फैला लें।
➢ अब अपने दाएं पैर के पंजे को पकड़कर दाएं पैर की एड़ी को बाय हिप के नीचे रख लें।
➢ अपने बाय पैर के पंजे को पकड़कर बाय पैर की एड़ी को दाएं जांघ के बगल में रख ले।
➢ इस स्थिति में आपका बाया घुटना दाएं घुटने के बिल्कुल ऊपर रहना चाहिए।
➢ अब अपने बाएं हाथ को सिर के बगल से पीछे ले जाएं और अपने दाहिने हाथ को पीछे कमर में ले जाएं और उन दोनों हाथों को आपस में मिला लें।
➢ अपने सिर को सीधा रखें, कमर को भी सीधा रखें।
➢ ऐसी स्थिति में सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
➢ कुछ देर इस स्थिति में रुकने के बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।
➢ यह बाई तरफ से गोमुखासन हुआ। इसी तरह से आपको दाएं तरफ से ही गोमुखासन का अभ्यास करना है।

प्रोस्टेट के लिए योग वक्रासन

➢ वक्रासन करने से पेट की चर्बी कम होती है, कब्ज की परेशानी दूर होती है और यह प्रोस्टेट में भी लाभदायक होता है।
➢ वक्रासन करने के लिए चटाई पर बैठ जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को सामने की तरफ फैला लें।
➢ यह भी पढ़े: पेट साफ करने के लिए योग- कब्ज, गैस, अपच का इलाज
➢ अब अपने दाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाएं पैर के पंजे को बाएं जांघ के बगल में रख ले।
➢ अपने बाएं हाथ की कोहनी को दाएं पैर के घुटने के दाहिनी तरफ रखें और बाएं हाथ से बाएं पैर के घुटने को पकड़ ले।
➢ अपने दाहिने हाथ को कमर के पास रख ले और अपनी गर्दन को दाहिने तरफ घुमा ले।
➢ इस स्थिति में सामान्य रूप से सांस लेते रहे और कुछ देर बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाए।
➢ सामान्य स्थिति में आने के बाद इसी प्रक्रिया को बाएं तरफ से भी दोहराएं।

प्रोस्टेट के लिए योग चक्कीचलनासन

➢ चक्कीचलनासन करने से तनाव दूर होता है, पेट की चर्बी कम होती है और प्रोस्टेट रोगों में भी लाभ होता है।
➢ चक्कीचलनासन करने के लिए चटाई पर बैठ जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को एक दूसरे से दूर-दूर फैला लें।
➢ दोनों पैरों के घुटने सीधे रहने चाहिए। अपनी कमर को भी सीधा रखें।
➢ अब अपने दोनों हाथों को आपस में मिला लें और जिस प्रकार से चक्की चलाई जाती है उसी प्रकार से अपने हाथों को घुमाना है।
➢ हाथों को घुमाते समय हाथों की कोहनियाँ सीधी रहनी चाहिए।
➢ आपको पहले अपने हाथों को क्लॉक वाइज घुमाना है।
➢ जब आप हाथ घुमायें तब हाथ पैरों के पंजों के ऊपर से होते हुए जांघों के ऊपर से निकलने चाहिए।
➢ जितने बार आप क्लॉकवाइज इस प्रक्रिया को दोहराते हैं उतनी ही बार आपको एंटी क्लॉकवाइज भी अपने हाथों को चलाना है।
➢ इसका अभ्यास करते समय आपको गहरी सांस लेते रहना है।

प्रोस्टेट के लिए योग पश्चिमोत्तानासन

➢ पश्चिमोत्तानासन के नियमित अभ्यास से पाचन तंत्र मजबूत होता है, चर्बी कम होती है और यह प्रोस्टेट के रोगों में भी लाभदायक होता है।
➢ पश्चिमोत्तानासन करने के लिए एक चटाई पर बैठ जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों को सामने की तरफ फैला लें और पैरों के घुटनों को सीधा रखें।
➢ आपके दोनों पैर आपस में मिले हुए होने चाहिए।
➢ अब सांस लेते हुए अपने हाथों को सिर के ऊपर तक उठाएं।
➢ सांस छोड़ते हुए सामने की तरफ झुके और अपने हाथों से अपने पैरों को छुए।
➢ अपने माथे को भी आप अपने घुटनों से लगाने का प्रयास करें।
➢ कुछ सेकंड इस स्थिति में रुकने के बाद सांस लेते हुए वापस ऊपर उठ जाएं।
➢ इस प्रक्रिया को 10 से 12 बार दोहराएं।

प्रोस्टेट के लिए योग भुजंगासन

➢ भुजंगासन भी प्रोस्टेट में लाभदायक होता है और यह पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है।
➢ भुजंगासन करने के लिए चटाई पर पेट के बल लेट जाएं।
➢ अपने दोनों हाथों को सीने के बगल में रखें।
➢ दोनों पैरों के बीच में एक से डेढ़ फुट का अंतर बना लें।
➢ अब सांस लेते हुए अपनी छाती और पेट को ऊपर उठाएं।
➢ अपनी नाभि तक के हिस्से को ऊपर उठाना है।
➢ कुछ सेकंड इस स्थिति में रुके फिर सांस छोड़ते हुए वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।
➢ इस तरह से आपको भुजंगासन के भी 10 से 12 चक्र करना है।

प्रोस्टेट के लिए धनुरासन योग

➢ धनुरासन योग करने से भी पाचन तंत्र सुचारू रूप से कार्य करता है और यह प्रोस्टेट रोगों में भी लाभप्रद है।
➢ धनुरासन करने के लिए चटाई पर पेट के बल लेट जाएं।
➢ अब अपने हाथों से अपने पैरों के पंजों को पकड़ ले और अपने शरीर को जितना हो सके खींचने का प्रयास करें।
➢ आपको अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखना है।
➢ यह भी पढ़े: चक्कर आने पर योग- वर्टिगो का इलाज
➢ इस स्थिति में सामान्य रूप से सांस लेते रहें और कुछ देर बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।
➢ धनुरासन करने के बाद आपको बालासन का अभ्यास जरूर करना चाहिए।

आमतौर पर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब

प्रोस्टेट में क्या नहीं खाना चाहिए?

प्रोस्टेट में आपको डेयरी उत्पाद, नमक, शराब, सिगरेट का सेवन नहीं करना चाहिए। अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए और नियमित रूप से व्यायाम या योग अभ्यास करना चाहिए।

प्रोस्टेट का नार्मल साइज क्या है?

प्रोस्टेट का नॉर्मल साइज 18 से 20 ग्राम होता है लेकिन कई कारणों से यह बढ़कर 50 ग्राम से लेकर 100 ग्राम तक हो जाता है जोकि घातक साबित हो सकता है। इससे आपकी किडनी फेल हो सकती है या कैंसर का खतरा रहता है।

प्रोस्टेट में क्या तकलीफ होती है?

प्रोस्टेट का आकार अधिक बढ़ जाने पर मूत्र मार्ग में बाधा आने लगती है जिससे पेशाब करने में परेशानी होती है इसके साथ ही बार-बार पेशाब आती है।

सारांश

प्रोस्टेट पुरुषों में पाई जाने वाली एक ग्रंथि होती है जिसे पीयूष ग्रंथि भी कहा जाता है। यह ग्रंथि स्पर्म की मात्रा और गुणवत्ता को निर्धारित करती है इसलिए इस ग्रंथि का शरीर में महत्वपूर्ण स्थान होता है। यदि इसमें कोई खराबी आती है तो यह इनफर्टिलिटी, कैंसर जैसी बीमारी का कारण बन सकती है इसलिए इसको स्वस्थ बनाए रखना बहुत जरूरी होता है।

इसको स्वस्थ बनाए रखने के लिए नियमित रूप से योग करना सबसे अच्छा माध्यम है क्योंकि योग करने के लिए हमें किसी भी प्रकार की मशीनों की आवश्यकता भी नहीं होती और पैसे भी खर्च नहीं होते ना ही हमें दवाइयों का सेवन करना होता है। योग के जरिए इसे पूरी तरह से स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है। इसके साथ ही अपने आहार में भी हमें संतुलित भोजन ही करना चाहिए। अधिक मात्रा में जंक फूड, शराब, तंबाकू का सेवन हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक साबित हो सकता है।

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