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योग क्या है, योग कितने प्रकार के होते हैं

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योग क्या है, योग कितने प्रकार के होते हैं

योग क्या है

महर्षि पतंजलि के अनुसार चित्त वृत्तियों का निरोध ही योग है। चित्त वृत्तियों के निरोध के लिए महर्षि पतंजलि ने अष्टांगिक मार्ग बतलाया है जिसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि आती है। यदि कोई व्यक्ति इस अष्टांगिक मार्ग का सही तरह से पालन करता है तो वह अपनी चित्तवृत्तियों को रोककर मोक्ष की स्थिति को पा सकता है।

श्रीमद्भागवत गीता के अनुसार अपने कर्मों में निपुणता हासिल करना ही योग है। इस तरह से गीता के अनुसार जो भी कार्य आप कर रहे हैं उस कार्य में पूरी तरह से निपुणता हासिल करने का प्रयास करें इसी को गीता में योग बताया गया है। (जल्दी हाइट बढ़ाने के योग कौन से है)

योग कितने प्रकार के होते हैं

कुछ जगह से हमें योग के चार प्रकार होने की जानकारी मिलती है। योग के चार प्रकार हैं राजयोग, कर्मयोग, भक्ति योग और ज्ञान योग। कुछ जगह से हमें योग के सात प्रकार होने की जानकारी मिलती है। योग के सात प्रकार हैं हठ योग, राजयोग, कर्मयोग, भक्ति योग, ज्ञान योग, तंत्र योग, लय योग। यहां पर हम इन सभी का वर्णन कर रहे हैं।

हठ योग

मुद्रा, प्राणायाम, आसन, प्रत्याहार, ध्यान, समाधि और षट्कर्म यह हठयोग के सात अंग माने जाते हैं। हठयोगी का मुख्य उद्देश्य कुंडली जाग्रत कर मोक्ष पाना होता है या कैवल्य की स्थिति में पहुंचना होता है इसीलिए वह विशेष रूप से आसन, प्राणायाम, मुद्रा पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है। इसी को क्रिया योग भी कहा जाता है।

राजयोग

राजयोग को अष्टांग योग के नाम से भी जाना जाता है। इसमें महर्षि पतंजलि ने मोक्ष पाने के लिए आठ मार्ग बताए हैं। इनमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि आती है। इस अष्टांगिक मार्ग पर चलकर कैवल्य की स्थिति को पाया जा सकता है।

कर्मयोग

कर्मयोग में अपने कर्मों पर जोर दिया जाता है। अपने कर्मों को सही तरह से करना और अपने कर्मों में निपुणता हासिल करना ही कर्म योग कहलाता है।

भक्ति योग

भक्ति योग में नव विद्या भक्ति को शामिल किया जाता है। इसमें भक्ति करने के 9 प्रकार बताए गए हैं जिनमें श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पाद सेवन अर्चन, वंदन, दास्य, संख्य और आत्मनिवेदन आता है।

ज्ञान योग

ज्ञान योग में आत्मज्ञान प्राप्त करना आता है। इसे ही ध्यान योग, ब्रह्म योग या सांख्य योग भी कहा जाता है।

तंत्र योग

तंत्र योग में स्त्री और पुरुष अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हुए कुंडली जागरण पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

लय योग

लय योग में 8 अंग आते हैं। जिनमें यम, नियम, स्थूल क्रिया, प्रत्याहार, सूक्ष्म क्रिया, धारणा, ध्यान और समाधि आती है।

योग के लाभ क्या है

मानसिक शांति के लिए योग

योग करने से हमारा मन शांत रहता है जिससे तनाव, अवसाद दूर होता है, पाचन शक्ति बेहतर होती है, नींद अच्छी आती है और हम मानसिक शांति महसूस करते हैं। (कमर दर्द के लिए सबसे अच्छा योग आसन)

बीमारियों से लड़ने की शक्ति बढ़ाने के लिए योग

योग करने से हमारी इम्यूनिटी बढ़ती है जिससे हमें बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है और हम स्वस्थ रहते हैं।

वजन नियंत्रण करने के लिए योग

योग करने से हमारे शरीर में जमी अतिरिक्त चर्बी दूर हो जाती है जिससे हमारा वजन नियंत्रण में रहता है और हम अंदर से मजबूत बनते हैं।

शारीरिक स्वास्थ्य के लिए योग

योग करने से हमारा शरीर लचीला और मजबूत बनता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और हमारी दिमागी क्षमता भी बढ़ती है इस तरह से योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है।

आमतौर पर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब

योग को कितने भागों में बांटा गया है?

मुख्यरूप से योग को चार भागों में बांटा गया है कर्म योग, भक्ति योग, ज्ञान योग और क्रिया योग।

योग के कितने अंग हैं?

महर्षि पतंजलि ने योग के आठ अंग बताए हैं। यह आठ अंग इस प्रकार हैं-

  1. यम
  2. नियम
  3. आसन
  4. प्राणायाम
  5. प्रत्याहार
  6. धारणा
  7. ध्यान
  8. समाधि

योग का आठवां अंग कौन सा होता है?

महर्षि पतंजलि के अनुसार योग का आठवां अंग समाधि है। समाधि में ही हमें मोक्ष की प्राप्ति होती है जिसे कैवल्य भी कहा जाता है।

योग में नियम क्या है?

शौच यानी की पवित्रता, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर शरणागति यह पांच नियम महर्षि पतंजलि ने अष्टांग योग में बतलाए हैं।

अष्टांग योग में शौच क्रिया क्या है?

महर्षि पतंजलि ने अष्टांग योग में 5 नियम बताए हैं, जिनमें पहला होता है शौच। शौच का अर्थ होता है अपने आप को अंदर से पवित्र बनाना। इसके लिए अपने शरीर, अपने घर, ऑफिस, वस्त्र को पवित्र रखना इनमें साफ सफाई रखना आता है, शुद्ध एवं सात्विक भोजन करना, सभी लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करना, सभी लोगों के प्रति सद्भाव रखना, अपने विचारों को हमेशा शुद्ध रखना, सभी के प्रति मैत्रीपूर्ण व्यवहार करना और नकारात्मक विचारों, नकारात्मक सोच, राग, द्वेष, क्रोध जैसी बुराइयों से दूर रहना इसे ही महर्षि पतंजलि में शौच बतलाया है।

सारांश

योग के प्रकार के बारे में हमें कई जानकारी मिलती हैं कुछ जगह से हमें योग के चार प्रकार होने की जानकारी मिलती है तो कुछ जगह से योग के सात प्रकार होने की जानकारी भी हमें मिलती है, आज के समय में कई नए प्रकार के योग भी शुरू हो गए हैं उनको भी योग ही माना जा रहा है। यहां पर हमने धार्मिक ग्रंथो या पुराणों में योग के बारे में जो जानकारी मिलती है उसे बताने का प्रयास किया है।

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