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अनुलोम विलोम प्राणायाम के लाभ क्या हैं

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अनुलोम विलोम प्राणायाम के लाभ क्या हैं

अनुलोम का मतलब होता है सीधा अर्थात आपकी नासिका का दाया छिद्र और विलोम का मतलब होता है उल्टा अर्थात आपकी नासिका का बाया छिद्र। अनुलोम विलोम प्राणायाम करते समय हम अपनी नासिका के एक छिद्र से सांस लेते हैं और दूसरे छिद्र से सांस छोड़ देते हैं इसीलिए इसे अनुलोम विलोम प्राणायाम कहां जाता है। इस प्राणायाम को नाड़ी शोधन प्राणायाम के नाम से भी जाना जाता है। नाड़ी शोधन प्राणायाम के नियमित अभ्यास से शरीर पूरी तरह निरोगी हो जाता है साथ ही गठिया, जोड़ों का दर्द, पैरों की सूजन जैसी कई सारी बीमारियां कभी नहीं होती।

अनुलोम विलोम कितने मिनट करना चाहिए?

अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से हमारे शरीर में मौजूद विषैली वायु बाहर निकल जाती है और ताजी वायु शरीर में जाती है जिससे रक्त की भी शुद्धि होती है। अनुलोम-विलोम प्राणायाम सुबह के समय करना सबसे ज्यादा लाभदायक होता है इसका अभ्यास खाली पेट 10 मिनट करना चाहिए।

अनुलोम विलोम का सही तरीका क्या है?

➢ अनुलोम विलोम प्राणायाम करने के लिए चटाई पर सुखासन, सिद्धासन, अर्ध पद्मासन या पद्मासन में बैठ जाएं।
➢ अब अपने दाएं हाथ के अंगूठे से अपनी नासिका के दाये छिद्र को बंद करें और अपनी नासिका के बाएं छिद्र से गहरी सांस अंदर ले।
➢ गहरी सांस अंदर लेने के बाद अपनी कनिष्ठा और अनामिका अंगुली से अपनी नासिका के बाएं छिद्र को बंद करें और दाएं नासिका से अपने अंगूठे को हटा ले।
➢ अब पूरी सांस को दाएं छिद्र से बाहर निकाल दें।
➢ यह भी पढ़े: सुबह करने वाले योग-जो बनाएंगे स्वस्थ और तंदुरुस्त
➢ सांस बाहर छोड़ने के बाद नासिका के दाएं छिद्र से ही गहरी सांस अंदर ले।
➢ गहरी सांस अंदर लेने के बाद अपने अंगूठे से नासिका के दाये छिद्र को बंद करें और बाएं छिद्र से अपनी कनिष्ठा और अनामिका अंगुली को हटा ले।
➢ अब पूरी सांस को नासिका के बाएं छिद्र से बाहर निकाल दें।
➢ इस प्रक्रिया को 10 मिनट तक दोहराये।

अनुलोम विलोम प्राणायाम के लाभ

➢ अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से हमारे फेफड़ों की कार्य क्षमता बढ़ती है और फेफड़े मजबूत होते हैं।
➢ इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से शरीर में इम्युनिटी बढ़ती है जिससे बीमारियां दूर रहती हैं।
➢ अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से शरीर की मांसपेशियां भी मजबूत बनती है।
➢ यह प्राणायाम तनाव या डिप्रेशन को दूर रखता है जिससे मन शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है।
➢ अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से दिल भी मजबूत होता है और दिल से जुड़ी बीमारियां भी ठीक रहती हैं।
➢ यदि आपका वजन ज्यादा है तो अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से वजन को कम किया जा सकता है।
➢ इस प्राणायाम के अभ्यास से पाचन शक्ति भी दुरुस्त होती है जिससे गैस, कब्ज की परेशानी नहीं होती।
➢ इस प्राणायाम को करने से पूरे शरीर में शुद्ध ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है साथ ही गठिया, दमा, सर्दी, जुकाम जैसी बीमारियां भी दूर रहती है।

अनुलोम विलोम प्राणायाम की सावधानियां

➢ अनुलोम विलोम प्राणायाम करते समय सामान्य गति से सांस लेना और छोड़ना चाहिए। बहुत ज्यादा तेजी से सांस लेना या छोड़ना सही नहीं रहता है।
➢ यह भी पढ़े: ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए योग
➢ यदि आपको कोई गंभीर बीमारी है या फिर दिल या फेफड़े से जुड़ी कोई बीमारी है तो किसी योग के विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही अनुलोम विलोम प्राणायाम करें।

सारांश

अनुलोम विलोम प्राणायाम के नियमित अभ्यास से शरीर में मौजूद विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं और शरीर अंदर से शुद्ध हो जाता है जिससे हमारा मन भी शांत रहता है और तनाव, चिंता दूर होती है। इस प्राणायाम को करने से हमें अनेको लाभ प्राप्त होते हैं जैसे कि सर्दी, जुखाम जैसी बीमारियां दूर रहती हैं, वजन नियंत्रण में रहता है, पाचन शक्ति मजबूत होती है, इम्यूनिटी बढ़ती है लेकिन हमें इस प्राणायाम को करते समय कुछ सावधानियों का भी ध्यान रखना चाहिए। सांस लेते और छोड़ते समय सामान्य गति से सांस लेनी चाहिए ज्यादा तेजी से सांस लेना या छोड़ना अच्छा नहीं होता है।

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