Categories: योग

भस्त्रिका प्राणायाम के लाभ-दमा और फेफड़े के लिए लाभदायक

Share

भस्त्रिका प्राणायाम के लाभ-दमा और फेफड़े के लिए लाभदायक

भस्त्रिका एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है धौंकनी। धौंकनी लोहार के द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक उपकरण होता है जिसका प्रयोग लोहार आग की भट्टी को हवा करने के लिए करता है। लोहे को तपाने से लोहे में मौजूद अशुद्धियां खत्म हो जाती है इसी प्रकार भस्त्रिका प्राणायाम करने से हमारे शरीर में मौजूद दूषित पदार्थ या अशुद्धियाँ नष्ट हो जाती हैं।

वर्तमान समय में प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है जिससे सांसो के जरिए दूषित हवा, धूल, मिट्टी के कण हमारे शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं जो कई सारी बीमारियों का कारण बन सकते हैं लेकिन भस्त्रिका प्राणायाम करने से हमारे शरीर की अशुद्धियां नष्ट हो जाती हैं इसके साथ ही इस प्राणायाम को करने से हमारी पाचन शक्ति मजबूत होती है, लिवर, किडनी, फेफड़े मजबूत होते हैं, दमा, टीवी, मोटापा जैसी परेशानियां भी दूर होती है।

भस्त्रिका प्राणायाम करने की विधि

➢ भस्त्रिका प्राणायाम करने के लिए सिद्धासन, पद्मासन, अर्ध पद्मासन में बैठ जाएं।
➢ अपने हाथों से ज्ञान मुद्रा बना लें और अपने हाथों को अपने पैरों के घुटनों पर रख ले।
➢ अब गहरी सांस लें और उसको तेजी से बाहर निकाल दें।
➢ इस तरह से गहरी सांसे लेना और उसे तेजी से बाहर निकाल देना भस्त्रिका प्राणायाम कहलाता है।
➢ यह भी पढ़े: भ्रामरी प्राणायाम के लाभ क्या हैं
➢ आपको 2 सेकंड में एक गहरी सांस लेना है और उसे 2 सेकंड में ही पूरा बाहर निकाल देना है।
➢ जैसे-जैसे आप भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास करते जाएंगे आपको इसे करने की गति को भी बढ़ाते जाना है।
➢ कुछ समय पश्चात आपको 2 सेकंड में दो गहरी सांसे लेनी है और दो बार सांसो को बाहर निकाल देना है।
➢ इसी तरह से और अभ्यास होने पर 1 सेकंड में 4 से 5 बार सांस लेना और उसे बाहर निकाल देना है।

भस्त्रिका प्राणायाम के लाभ

➢ भस्त्रिका प्राणायाम करने से वजन नियंत्रण में रहता है और शरीर में मौजूद अतिरिक्त चर्बी दूर हो जाती है।
➢ भस्त्रिका प्राणायाम पाचन शक्ति को बढ़ाता है जिससे भूख अच्छी लगती है और पेट से जुड़ी बीमारियां जैसे की कब्ज, अपच, गैस की परेशानी नहीं होती।
➢ इस प्राणायाम को करने से वात, पित्त, कफ की परेशानी भी दूर होती है।
➢ भस्त्रिका प्राणायाम फेफड़ों के लिए भी लाभदायक होता है। इसे करने से फेफड़े मजबूत होते हैं और श्वास से संबंधित परेशानियां भी नहीं होती।
➢ इस प्राणायाम को करने से नाडियां शुद्ध होती हैं।
➢ इस प्राणायाम को करने से शरीर में मौजूद दूषित पदार्थ बाहर निकल जाते हैं जिससे शरीर अंदर से शुद्ध होता है।
➢ भस्त्रिका प्राणायाम करते समय हम गहरी सांस लेते हैं जिससे शरीर में ऑक्सीजन का लेवल बढ़ता है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकल जाती है।
➢ भस्त्रिका प्राणायाम करने से हमारी मानसिक क्षमता, एकाग्रता का भी विकास होता है और मन शांत रहता है।
➢ इस प्राणायाम को करने से रक्त का संचार शरीर के सभी अंगों में भली-भांति होता है साथ ही यह प्राणायाम रक्त की सफाई भी करता है।
➢ भस्त्रिका प्राणायाम करने से जठराग्नि तेज हो जाती है।
➢ यदि आपको ब्लॉकेज, बलगम, सायनस की परेशानी हो या फिर नाक या गले से जुड़ी कोई परेशानी हो तो भस्त्रिका प्राणायाम करने से उसमें भी लाभ होता है।

भस्त्रिका प्राणायाम कितनी देर करना चाहिए?

भस्त्रिका प्राणायाम का नियमित रूप से 5 से 10 मिनट अभ्यास करना चाहिए। भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास करने से दमा, टीबी जैसी बीमारियां दूर होती हैं, किड़नी, लिवर, फेफड़े मजबूत होते हैं, मोटापा दूर होता है, पाचन शक्ति मजबूत होती है।

भस्त्रिका प्राणायाम की सावधानियां

➢ भस्त्रिका प्राणायाम करने से पहले अपनी नाक को अच्छे तरीके से साफ कर लेना चाहिए।
➢ यह प्राणायाम हमेशा खुली और हवादार स्थान पर ही करना चाहिए।
➢ इसका अभ्यास करते समय अपनी क्षमता से ज्यादा शक्ति नहीं लगाना चाहिए।
➢ यह भी पढ़े: अनुलोम विलोम प्राणायाम के लाभ क्या हैं
➢ भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास दिन में केवल एक बार ही करना चाहिए वो भी सुबह के समय ही।
➢ भस्त्रिका प्राणायाम करते समय अधिक जोर जबरदस्ती नहीं करना चाहिए और अपने शरीर को जोर-जोर से नहीं हिलाना चाहिए।
➢ इस प्राणायाम को करते समय सांस लेने और छोड़ने का समय एक बराबर होना चाहिए।
➢ यदि आपको शुरुआत में सांस लेने और छोड़ने में परेशानी होती है तो धीरे-धीरे सांस लें और सांस छोड़ें।
➢ भस्त्रिका प्राणायाम दोनों ही नासिका छिद्रों से एक साथ किया जाता है।
➢ यदि आपको बीपी, अल्सर, ह्रदय रोग, हर्निया जैसी परेशानियां हैं तो किसी योग के विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही इसका अभ्यास करना चाहिए।
➢ भस्त्रिका प्राणायाम करते समय आपका पेट खाली रहना चाहिए इसीलिए 1 घंटे पहले और 1 घंटे बाद तक कुछ ना खाए ना पिए।
➢ गर्मी के दिनों में भस्त्रिका प्राणायाम करने के बाद शीतली प्राणायाम जरूर करना चाहिए ताकि आपका शरीर ज्यादा गर्म ना हो पाए।

सारांश

➢ भस्त्रिका प्राणायाम करने से हमारे शरीर में मौजूद अशुद्धियां दूर हो जाती हैं जिससे शरीर अंदर से शुद्ध हो जाता है।
➢ इस प्राणायाम को करने से कई सारी गंभीर बीमारियां जैसे कि दमा, टीवी, मोटापा दूर होता है और हमारे फेफड़े, किडनी, लिवर मजबूत होते हैं।
➢ भस्त्रिका प्राणायाम करते समय हमें कुछ सावधानियों का भी ध्यान रखना चाहिए जैसे कि भस्त्रिका प्राणायाम करने से पहले अपनी नाक को साफ कर लेना चाहिए, सांसो को बहुत अधिक जोर से ना लेना चाहिए और ना ही छोड़ना चाहिए, कोई गंभीर बीमारी होने पर योग के विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह जरूर ले लेना चाहिए।
➢ यदि इन सभी बातों को ध्यान में रखकर आप योग करेंगे तो आपको योग का अधिकतम लाभ प्राप्त होगा।

यह भी पढ़े:-
सुबह करने वाले योग-जो बनाएंगे स्वस्थ और तंदुरुस्त
ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए योग
पैर दर्द के लिए योग
मानसिक रोग के लिए योग
प्रोस्टेट के लिए योग

Published by
admin

Recent Posts

भ्रामरी प्राणायाम के लाभ क्या हैं

भ्रामरी प्राणायाम के लाभ क्या हैं भ्रामरी प्राणायाम का नाम बढ़ई मधुमक्खी के नाम पर… Read More

2 days ago

अनुलोम विलोम प्राणायाम के लाभ क्या हैं

अनुलोम विलोम प्राणायाम के लाभ क्या हैं अनुलोम का मतलब होता है सीधा अर्थात आपकी… Read More

4 days ago

सुबह करने वाले योग-जो बनाएंगे स्वस्थ और तंदुरुस्त

सुबह करने वाले योग-जो बनाएंगे स्वस्थ और तंदुरुस्त सुबह का समय योग करने के लिए… Read More

4 days ago

ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए योग

ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए योग शरीर में ऑक्सीजन बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि रक्त… Read More

1 week ago

पैर दर्द के लिए योग

पैर दर्द के लिए योग वर्तमान समय में खराब लाइफस्टाइल की वजह से, ज्यादा देर… Read More

2 weeks ago

मानसिक रोग के लिए योग

मानसिक रोग के लिए योग आज के समय में लोगों की महत्वकांक्षा इतनी ज्यादा बढ़… Read More

2 weeks ago