Categories: योग

भ्रामरी प्राणायाम के लाभ क्या हैं

Share

भ्रामरी प्राणायाम के लाभ क्या हैं

भ्रामरी प्राणायाम का नाम बढ़ई मधुमक्खी के नाम पर रखा गया है जिसे भ्रामरी भी कहा जाता है। इस प्राणायाम को करते समय हमारे मुख से मधुमक्खी के भिन-भिनाने जैसी आवाज आती है। इस भिन-भिनाने की आवाज से जो कंपन महसूस होता है उसे हम अपने चेहरे, गले, जबड़े में महसूस कर सकते हैं। इस प्राणायाम को करने से हमारा मन शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है साथ ही हमारी मानसिक क्षमता का भी विकास होता है।

वर्तमान की व्यस्त जीवनशैली में लोगों पर काम का दबाव और तनाव इतना बढ़ चुका है कि उन्हें गुस्सा जल्दी आता है, बेचैनी होने लगती है और उनका ब्लड प्रेशर हाई या लो होने लग जाता है। यह परेशानी ना केवल उन लोगों को है जो ऑफिसों में कार्य करते हैं बल्कि घरों में कार्य करने वाली महिलाओं में भी यह परेशानी देखने में आ रही है। तनाव या अवसाद की वजह से उनका अपने कार्य पर फोकस नहीं रहता है जिससे वे अपने कार्य को सही तरह से नहीं कर पाते हैं जिसका असर उनके जीवन पर साफ तौर पर देखा जा सकता है।

इस तनाव या अवसाद से बचने के लिए भ्रामरी प्राणायाम सबसे कारगर तरीका है। इस प्राणायाम को करने से हमारा मन शांत रहता है, एकाग्रता बढ़ती है, मानसिक क्षमता का विकास होता है जिससे हम तनाव मुक्त जीवन जी पाते हैं।

भ्रामरी प्राणायाम कैसे करें?

➢ भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए सुखासन या पद्मासन में शांति से बैठ जाएं।
➢ अपने अंगूठे से अपने कानों को बंद करें।
➢ आपकी कनिष्ठा उंगली आपके चेहरे पर रहेगी।
➢ यह भी पढ़े: अनुलोम विलोम प्राणायाम के लाभ क्या हैं
➢ अनामिका उंगली को अपनी नाक पर रखें।
➢ मध्यमा उंगली को अपनी आंखों पर रखें और तर्जनी उंगली को अपने माथे पर रखें।
➢ अब आपको गहरी सांस लेना है और सांस छोड़ते हुए मधुमक्खी के भिन-भिनाने जैसी आवाज निकालनी है या फिर आप ओम का उच्चारण भी कर सकते हैं।
➢ पूरी सांस छोड़ने के बाद आपको फिर से गहरी सांस लेनी है और इसी प्रक्रिया को फिर से दोहराना है।
➢ इस प्राणायाम को करते समय आपको अपनी आंखों को बंद रखना है और अपना ध्यान भिन-भिनाने की आवाज पर या ओम के उच्चारण पर केंद्रित करना है।
➢ इस प्राणायाम का अभ्यास आपको नियमित रूप से 5 से 10 मिनट करना है।

भ्रामरी प्राणायाम के लाभ

➢ भ्रामरी प्राणायाम करने से मन शांत रहता है, आत्मविश्वास बढ़ता है, चिंता, तनाव दूर होता है जिससे आप अपने कार्य पर अच्छे से फोकस कर पाते हैं।
➢ कई बार थायरॉइड के अनियंत्रित हो जाने से मोटापा असामान्य रूप से बढ़ना शुरू हो जाता है लेकिन भ्रामरी प्राणायाम करने से थायरॉइड नियंत्रण में रहती है जिससे मोटापा असामान्य रूप से नहीं बढ़ पाता।
➢ यदि आपको गुस्सा जल्दी आता है तो आपको भ्रामरी प्राणायाम जरूर करना चाहिए। भ्रामरी प्राणायाम करने से आपका मन शांत रहेगा जिससे गुस्सा नहीं आएगा।
➢ कई बार ठंड के मौसम में हमारी नाक बंद हो जाती है, सिर में दर्द होता है, नाक से पानी निकलने लगता है या आधे सिर में बहुत तेज दर्द होता है। यदि आप भ्रामरी प्राणायाम करते हैं तो आपको यह परेशानी नहीं होगी।
➢ यदि आपको हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप की परेशानी है तब भी आपको भ्रामरी प्राणायाम नियमित रूप से करना चाहिए। इसको करने से यह परेशानी दूर रहती है।
➢ यदि आपको अल्जाइमर, माइग्रेन, अनिद्रा, साइनोसाइटिस की परेशानी है तब भी भ्रामरी प्राणायाम बहुत ज्यादा लाभदायक होता है। भ्रामरी प्राणायाम करने से मस्तिष्क में रक्त नहीं जमता और सिर दर्द की परेशानी भी दूर होती है।
➢ यदि आपको अधिक गर्मी लगती है और गर्मी की वजह से सिर में दर्द होता है तब भी भ्रामरी प्राणायाम लाभदायक है।
➢ भ्रामरी प्राणायाम करने से स्वर तंत्र मजबूत होता है जिससे आवाज में मधुरता आती है।
➢ इस प्राणायाम को करने से गले से जुड़ी परेशानियां भी दूर होती हैं।
➢ यदि महिलाएं भ्रामरी प्राणायाम करती हैं तो गर्भावस्था में एंडोक्राइन सिस्टम अच्छे से कार्य करता है जिससे बच्चे का जन्म आसानी से होता है।

भ्रामरी प्राणायाम क्या है?

भ्रामरी प्राणायाम सांसों के द्वारा की जाने वाली एक तकनीक है जिसके नियमित अभ्यास से मन शांत रहता है, एकाग्रता बढ़ती है और अनिद्रा, तनाव, चिंता दूर होती हैं।

भ्रामरी प्राणायाम की सावधानियां

➢ भ्रामरी प्राणायाम करते समय अपनी आंखों को, नाक को या कान को ज्यादा जोर से ना दबाएं। अपनी उंगलियों को केवल उनके ऊपर रखना है।
➢ भ्रामरी प्राणायाम करते समय अपने मुंह को बंद रखें।
➢ यह भी पढ़े: सुबह करने वाले योग-जो बनाएंगे स्वस्थ और तंदुरुस्त
➢ यदि आपको कोई गंभीर बीमारी हो, कोई गंभीर चोट लगी हो, ऑपरेशन हुआ हो तो डॉक्टर या योग के विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद ही योग अभ्यास करें।

सारांश

भ्रामरी प्राणायाम एक ऐसी तकनीक है जिसके नियमित अभ्यास से हमारी एकाग्रता बढ़ती है, मानसिक क्षमता का विकास होता है और चिंता, तनाव दूर होता है जिससे भ्रामरी प्राणायाम सभी लोगों के लिए लाभदायक है चाहे वे ऑफिस में कार्य करने वाले लोग हो, विद्यार्थी हो या महिलाएं हो। इसके नियमित अभ्यास से हमें अनेको लाभ प्राप्त होते हैं इसलिए इसका नियमित सुबह अभ्यास जरूर करना चाहिए। भ्रामरी प्राणायाम करने के साथ यह भी जरूरी है कि हम अपने आहार का ध्यान रखें। हमें अपने आहार में अंकुरित अनाज, फल, दूध, हरी पत्तेदार सब्जियों को भी शामिल करना चाहिए साथ ही हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थ जैसे कि सिगरेट, तंबाकू, शराब इनके सेवन से हमें हमेशा बचना चाहिए।

यह भी पढ़े:-
ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए योग
पैर दर्द के लिए योग
मानसिक रोग के लिए योग
प्रोस्टेट के लिए योग
पैंक्रियास के लिए योग

Published by
admin

Recent Posts

अनुलोम विलोम प्राणायाम के लाभ क्या हैं

अनुलोम विलोम प्राणायाम के लाभ क्या हैं अनुलोम का मतलब होता है सीधा अर्थात आपकी… Read More

2 days ago

सुबह करने वाले योग-जो बनाएंगे स्वस्थ और तंदुरुस्त

सुबह करने वाले योग-जो बनाएंगे स्वस्थ और तंदुरुस्त सुबह का समय योग करने के लिए… Read More

2 days ago

ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए योग

ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए योग शरीर में ऑक्सीजन बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि रक्त… Read More

6 days ago

पैर दर्द के लिए योग

पैर दर्द के लिए योग वर्तमान समय में खराब लाइफस्टाइल की वजह से, ज्यादा देर… Read More

2 weeks ago

मानसिक रोग के लिए योग

मानसिक रोग के लिए योग आज के समय में लोगों की महत्वकांक्षा इतनी ज्यादा बढ़… Read More

2 weeks ago

प्रोस्टेट के लिए योग

प्रोस्टेट के लिए योग प्रोस्टेट पुरुषों में पाई जाने वाली एक ग्रंथि होती है जो… Read More

2 weeks ago