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ब्रेन ट्यूमर के लिए योग-ब्रेन ट्यूमर से मुक्ति

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ब्रेन ट्यूमर के लिए योग-ब्रेन ट्यूमर से मुक्ति

शरीर के सभी अंगों में कोशिकाएं पाई जाती है जब इन कोशिकाओं का विकास अनियंत्रित रूप से होने लगता है तो कोशिकाओं के गुच्छे बनने लगते है। कोशिकाओं के ये गुच्छे ज्यादा बड़े होने पर गांठ का रुप ले लेते हैं इसे ही ट्यूमर कहां जाता है। ब्रेन ट्यूमर होने पर ना केवल हमारा मस्तिष्क प्रभावित होता है बल्कि हमारा पूरा शरीर प्रभावित होता है। कई बार ब्रेन ट्यूमर की वजह से आंखों की रोशनी भी चली जाती है। ब्रेन ट्यूमर के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से हर साल 8 जून को विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस के रुप में मनाया जाता है।

ब्रेन ट्यूमर होने पर कुछ लक्षण भी देखने में मिलते हैं जैसे कि आंखों की रोशनी कम हो जाना, मानसिक क्षमता में बदलाव होना, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी होना, सुनने की क्षमता का कम हो जाना, सुबह उठने पर सिर में दर्द महसूस होना, उल्टी जैसा महसूस होना। आज के समय में हमारे खाने-पीने की चीजों में यूरिया का इस्तेमाल हो रहा है साथ ही हम जंक फूड का भी अधिक सेवन कर रहे हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक है। हमें इनसे बचने का प्रयास करना चाहिए।

यहां पर हम आपको कुछ ऐसे योगासनों के बारे में बता रहे हैं जिनका नियमित अभ्यास आपको ब्रेन ट्यूमर की परेशानी से मुक्त कर सकता है।

ब्रेन ट्यूमर के लिए योग अनुलोम विलोम प्राणायाम

➢ अनुलोम विलोम प्राणायाम करने के लिए सिद्धासन, पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं।
➢ अब अपने दाएं हाथ के अंगूठे से अपनी नासिका के दाएं छिद्र को बंद करें।
➢ नासिका के दाएं छिद्र को बंद करने के बाद नासिका के बाएं छिद्र से गहरी सांस लें।
➢ सांस लेने के बाद अपने दाएं हाथ की कनिष्ठा और अनामिका अंगुलियों से नासिका के बाएं छिद्र को बंद करें और पूरी साँस को नासिका के दाएं छिद्र से बाहर निकाल दें।
➢ अब आपको नासिका के दाएं छिद्र से गहरी सांस लेनी है।
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➢ गहरी सांस लेने के बाद नासिका के दाएं छिद्र को अंगूठे से बंद कर लें और नासिका के बाएं छिद्र को खोलें और पूरी सांस को नासिका के बाएं छिद्र से बाहर निकाल दें।
➢ इस प्रक्रिया को लगभग 10 मिनट तक दोहराएं।
➢ इसे ही अनुलोम विलोम प्राणायाम कहा जाता है।
➢ अनुलोम विलोम प्राणायाम करते समय आपको बहुत ज्यादा जोर से सांस ना ही लेना है और ना ही छोड़ना है।
➢ शुरुआत में आपको सामान्य गति से सांस लेना है और सामान्य गति से ही सांस को बाहर छोड़ देना है। धीरे धीरे सांस लेने की गति बढ़ानी है।
➢ ब्रेन ट्यूमर को ठीक करने के लिए आपको नियमित रूप से आधे घंटे से 1 घंटे तक अनुलोम विलोम प्राणायाम करना होगा।

ब्रेन ट्यूमर के लिए योग कपालभाति प्राणायाम

➢ कपालभाति प्राणायाम करने के लिए सिद्धासन या सुखासन में बैठ जाएं।
➢ अपने हाथों से ज्ञान मुद्रा बना लें और उन्हें अपने घुटनों के ऊपर रख ले।
➢ अब आपको एक सेकंड में सांस लेनी है और 1 सेकंड में ही पूरी सांस को बाहर निकाल देना है।
➢ इस प्रक्रिया को 5 मिनट तक लगातार करें।
➢ 5 मिनट बाद कुछ देर का विश्राम ले और फिर इसी प्रक्रिया को 5 मिनट करें।
➢ इस तरह से शुरुआत में 5-5 मिनट के दो से तीन अभ्यास करें।
➢ जैसे-जैसे आप कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास करते जाएंगे इसके समय को बढ़ाते जाएं और 5 मिनट के स्थान पर 10-10 मिनट के लिए इसका अभ्यास करते जाएं और धीरे-धीरे इसके समय को और बढ़ाते जाएं।
➢ ब्रेन ट्यूमर के लिए आपको नियमित रूप से आधे घंटे से 1 घंटे तक कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास करना होगा।

ब्रेन ट्यूमर के लिए योग वज्रासन

➢ वज्रासन के नियमित अभ्यास से स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल कम होता है जिससे तनाव दूर होता है।
➢ इसे करने से पाचन शक्ति दुरुस्त होती है। हाथ, पैर, पीठ का दर्द भी दूर रहता है।
➢ वज्रासन करने के लिए फर्श पर दंडासन में बैठ जाएं।
➢ अपने बाएं हाथ को संतुलन बनाने के लिए फर्श पर रख ले।
➢ अपने दाएं पैर को घुटने से मोड़ते हुए दाएं पैर के पंजे को दाएं कूल्हे के नीचे रख ले।
➢ इसी प्रकार दाएं हाथ से संतुलन बनाने के लिए दाएं हाथ को फर्श पर रख लें और बाएं पैर को घुटने से मोड़कर बाएं पैर के पंजे को अपने बाएं कूल्हे के नीचे रखलें।
➢ इस स्थिति में आपके पैरों की एड़ियां बाहर की तरफ और पंजे अंदर की तरफ रहने चाहिए।
➢ अपनी कमर को सीधा रखें और अपनी आंखों को बंद कर ले।
➢ अपने हाथों को अपने पैरों के घुटनों पर रख लें।
➢ अब आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर वज्रासन की स्थिति में रुकने के बाद अपने बाएं हाथ से संतुलन बनाने के लिए बाएं हाथ को फर्श पर रख लें।
➢ दाएं पैर के घुटने को धीरे से सीधा कर ले।
➢ इसी प्रकार दाएं हाथ से संतुलन बनाने के लिए दाएं हाथ को फर्श पर रख लें और बाएं पैर को सीधा कर ले।

ब्रेन ट्यूमर के लिए योगासन ताड़ासन

➢ ताड़ासन करने से हमारे शरीर की मांसपेशियां लचीली बनती हैं साथ ही हमारे फेफड़े भी मजबूत बनते हैं।
➢ इसे करने से हमारा मन शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है।
➢ ताड़ासन करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं।
➢ अपने सिर और कमर को भी सीधा रखें।
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➢ अब सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर उठा ले।
➢ हाथों को ऊपर करते समय आपके हाथों की कोहनियाँ सीधी रहे।
➢ हाथों को सिर के ऊपर तक ले जाने के बाद दोनों हाथों को आपस में मिलाले और हथेलियों को आसमान की तरफ कर लें।
➢ अब आपको अपने पूरे शरीर को ऊपर की तरफ खींचना है।
➢ जब आप अपने शरीर को ऊपर की तरफ खींचे उस समय अपनी एड़ियों को भी जमीन से ऊपर उठा लेना है और अपने शरीर का पूरा वजन अपने पैरों के पंजों पर केंद्रित कर लेना है।
➢ कुछ सेकंड ऐसी स्थिति में रुकने के बाद सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में आ जाना है।
➢ इस तरह से आपको ताड़ासन के 10 से 12 चक्र करना है।

आमतौर पर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब

ब्रेन ट्यूमर क्या होता है?

जब ब्रेन में कोशिकाओं का गुच्छा बन जाता है और यह गठान या गाँठ का रूप ले लेता है तो ऐसे ही ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है।

ब्रेन ट्यूमर कैसे ठीक होता है?

ब्रेन ट्यूमर को ठीक करने के लिए आपको नियमित रूप से अनुलोम विलोम प्राणायाम और कपालभाति प्राणायाम करना होगा। जब कुछ लोगों को ब्रेन ट्यूमर हुआ और उनके पास ऑपरेशन कराने के लिए पैसे नहीं थे तो उन्होंने योग का रास्ता चुना और नियमित रूप से अनुलोम विलोम प्राणायाम, कपालभाति प्राणायाम किया जिससे कुछ महीनों में ही उनका ब्रेन ट्यूमर ठीक हो गया।

ब्रेन ट्यूमर के कितने स्टेज होते हैं?

मेडिकल साइंस के अनुसार ब्रेन ट्यूमर के चार स्टेज होते हैं। यदि तीसरी स्टेज में ब्रेन ट्यूमर का इलाज करा लिया जाए तो मेडिकल साइंस के अनुसार मरीज को बचाया जा सकता है।

सारांश

शरीर में कोशिकाएं पाई जाती हैं। जब ब्रेन की कोशिकाएं अनियंत्रित होकर बढ़ने लगती हैं और गांठ का रूप ले लेती है तो इसे ही ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है। ब्रेन ट्यूमर के कुछ सामान्य लक्षण भी होते हैं जैसे की आंखों की रोशनी कम हो जाना, मानसिक क्षमता में बदलाव आना, शरीर में कमजोरी रहना, सुनने की क्षमता कम हो जाना। यदि आपको यह लक्षण है तब आपके लिए यह जरूरी है कि ट्यूमर की जांच करा ली जाए। यदि आपको यह परेशानी है तब आपको नियमित रूप से योग करना शुरू कर देना चाहिए। नियमित रूप से कपालभाति और अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से ब्रेन ट्यूमर को ठीक किया जा सकता है।

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