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दिल को मजबूत बनाने के लिए योग

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दिल को मजबूत बनाने के लिए योग

यदि आप लंबी उम्र तक जीवित रहना चाहते हैं तो आपको अपने दिल को स्वस्थ बनाए रखना होगा। आज के समय में खराब लाइफस्टाइल का प्रभाव दिल पर भी पड़ता है जिस वजह से दिल से जुड़ी कई सारी बीमारियां हो जाती हैं। दिल कमजोर हो जाता है, दिल के वॉल्व खराब हो जाते हैं, आर्टरीज ब्लॉक हो जाती है, दिल धीमी या तेज गति से धड़कने लगता है। जब हमें दिल से जुड़ी कोई बीमारी होती है तब कुछ लक्षण भी देखने को मिलते हैं जैसे कि एड़ियों में सूजन आ जाना, सांस लेने में परेशानी होना, थकान महसूस होना, घबराहट होना।

यदि नियमित रूप से योग करना शुरू कर दिया जाए तो हम दिल से जुड़ी बीमारियों को ठीक कर सकते हैं। यहां पर जो योगासन बताए जा रहे हैं उनका नियमित अभ्यास आपको दिल से जुड़ी सभी प्रकार की बीमारियों में लाभ पहुंचाएगा।

दिल को मजबूत बनाने के लिए अनुलोम विलोम प्राणायाम

➢ अनुलोम विलोम प्राणायाम का अभ्यास दिल के स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा लाभदायक होता है।
➢ अनुलोम विलोम प्राणायाम करने के लिए योगा चटाई पर पद्मासन, सिद्धासन, सुखासन में बैठ जाएं।
➢ अपने सिर और कमर को सीधा रखें।
➢ अब आपको अपने दाएं हाथ के अंगूठे से नासिका के दाएं छिद्र को बंद कर लेना है और गहरी सांस लेना है।
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➢ गहरी सांस लेने के बाद अनामिका और मध्यमा उंगलियों से नासिका के बाएं छिद्र को बंद कर लेना है और दाएं छिद्र को खोल लेना है।
➢ अब आपको नासिका के दाएं छिद्र से पूरी सांस को बाहर निकाल देना है।
➢ सांस को बाहर निकालने के बाद फिर से आपको गहरी सांस लेनी है।
➢ गहरी सांस लेने के बाद अपने दाएं हाथ के अंगूठे से नासिका के दाएं छिद्र को फिर से बंद कर लेना है और बाएं छिद्र को खोल लेना है।
➢ बाएं छिद्र को खोलने के बाद फिर से पूरी साँस को नासिका के बाएं छिद्र से बाहर निकाल देना है।
➢ इस प्रक्रिया को 10 से 15 मिनट तक करना है।

दिल को मजबूत बनाने के लिए भ्रामरी प्राणायाम

➢ भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास भी दिल को मजबूत बनाने के लिए बहुत ज्यादा लाभदायक होता है इसके अभ्यास से दिल से जुड़ी बीमारियां ठीक हो जाती हैं।
➢ दिल को मजबूत बनाने के लिए अनुलोम विलोम प्राणायाम करने के बाद भ्रामरी प्राणायाम करना चाहिए।
➢ भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए अपनी तर्जनी उंगली को माथे पर रख लें।
➢ अंगूठे से अपने कानों को बंद कर ले।
➢ मध्यमा और अनामिका अंगुलियों को अपनी आंखों के ऊपर रख लें और कनिष्ठा उंगली को अपने नाक के पास रख ले।
➢ अब गहरी सांस लें और सांस छोड़ते हुए हूं की ध्वनि निकालें।
➢ इस तरह से आपको लगभग 10 मिनट इसका अभ्यास करना है।

दिल को मजबूत बनाने के लिए योग शीतकारी प्राणायाम

➢ शीतकारी प्राणायाम दिल को मजबूत बनाने के लिए लाभदायक होता है।
➢ शीतकारी प्राणायाम करने के लिए भी आपको योगा चटाई पर पद्मासन, अर्ध पद्मासन, सिद्धासन में से किसी भी आरामदायक आसन में बैठ जाना है।
➢ अपने हाथों से ज्ञान मुद्रा बना ले और उन्हें अपने पैरों के घुटनों पर रख ले।
➢ अब आपको अपने दांतो को एक के ऊपर एक रखना है और अपनी जीभ को दातों के पीछे लगाना है।
➢ अपने होंठों के बीच में जगह बनाएं और मुंह से गहरी साँस अंदर ले।
➢ साँस लेते समय दांत आपस में जुड़े हुए रहने चाहिए।
➢ साँस लेने के बाद पूरी सांस को नाक से बाहर निकाल देना है।
➢ इस प्रक्रिया को आपको 5 से 10 मिनट तक करना है।

दिल को मजबूत बनाने के लिए उष्ट्रासन योग

➢ उष्ट्रासन योग करने से भी हमारा दिल मजबूत बनता है क्योंकि उष्ट्रासन करते समय रक्त का संचार दिल की तरफ बढ़ जाता है जिससे दिल मजबूत होता है।
➢ उष्ट्रासन योग करने के लिए योगा चटाई पर अपने घुटनों के बल बैठ जाएं।
➢ पैरों के तलवे आसमान की तरफ रहने चाहिए।
➢ अब आपको अपने दाएं हाथ को पीछे ले जाते हुए दाएं पैर की एड़ी को पकड़ लेना है।
➢ इसी प्रकार से बाएं हाथ को पीछे ले जाते हुए बाएं पैर की एड़ी को पकड़ लेना है।
➢ अब आपको अपने सिर को पीछे झुकाना है।
➢ सिर को पीछे झुकाते समय आपको अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखना है।
➢ इस मुद्रा में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर इस मुद्रा में रुकने के बाद वापस सामान्य अवस्था में आ जाना है।

दिल को मजबूत बनाने के लिए मकरासन योग

➢ मकरासन योग का अभ्यास भी दिल को मजबूत बनाने के लिए बहुत लाभदायक होता है।
➢ मकरासन योग करने के लिए अपने पैरों को सीधा रखते हुए और पैरों के पंजों को आसमान की तरफ करते हुए जमीन पर पेट के बल लेट जाएं।
➢ अपने दाएं हाथ की हथेली को बाएं कंधे पर रखें और बाएं हाथ की हथेली को दाएं कंधे पर रखें।
➢ कोहनियां जमीन पर रहना चाहिए।
➢ अपने सिर को अपने हाथों के बीच में रख ले।
➢ इस अवस्था में आपको आरामदायक अवधि के लिए रुकना है और फिर वापस सामान्य अवस्था में आ जाना है।
➢ मकरासन करते समय सामान्य गति से सांस लेते रहें।

दिल को मजबूत बनाने के लिए धनुरासन योग

➢ धनुरासन योग का अभ्यास भी दिल के लिए बहुत ज्यादा लाभदायक होता है।
➢ धनुरासन योग करने के लिए पेट के बल योगा चटाई पर लेट जाएं।
➢ अपने दोनों पैरों के बीच में कंधों जितना अंतर बना ले।
➢ अब दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए पैरों के पंजों को अपनी कमर के पास ले आए।
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➢ अपने दोनों हाथों को पीछे ले जाते हुए पैरों के पंजों को पकड़ ले।
➢ अब अपनी रीढ़ की हड्डी और हाथों की कोहनियों को सीधा रखते हुए पैरों को ऊपर उठाने का प्रयास करें।
➢ धनुरासन करते समय सामान्य गति से सांस लेते रहें और आरामदायक अवधि के लिए इस मुद्रा में रुके।
➢ इसके बाद वापस सामान्य मुद्रा में आ जाएं।

दिल को मजबूत बनाने के लिए योग वृक्षासन

➢ वृक्षासन योग भी दिल की बीमारियों में लाभदायक होता है।
➢ वृक्षासन योग करने के लिए योगा चटाई पर सीधे खड़े हो जाएं।
➢ अब अपने दाएं पैर के पंजे को बाएं पैर की जांघ पर रख लें।
➢ अपने बाएं पैर को मजबूती से जमीन पर टिकाए रखें।
➢ अब सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर तक ले जाएं और नमस्कार मुद्रा बनाले।
➢ इस स्थिति में आपको आरामदायक अवधि के लिए रुकना है और सामान्य रूप से सांस लेते रहना है।
➢ कुछ देर बाद वापस सामान्य अवस्था में आ जाना है।
➢ इस तरह से आपको वृक्षासन का अभ्यास बाएं पैर से भी करना है।

आमतौर पर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब

हार्ट पेशेंट को कौन सा योगा करना चाहिए?

हार्ट पेशेंट को नियमित रूप से ताड़ासन, भुजंगासन, वृक्षासन, सूर्य नमस्कार, उष्ट्रासन, अनुलोम विलोम प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, शीतकारी प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए। हार्ट पेशेंट के लिए प्राणायाम बहुत ज्यादा लाभदायक होता है।

दिल को मजबूत बनाने के लिए क्या खाना चाहिए?

दिल को मजबूत बनाने के लिए आपको अखरोट, बादाम, अलसी के बीज खाने चाहिए। इसके साथ ही टमाटर, गाजर, पालक का भी सेवन करना चाहिए। यदि आप नियमित रूप से अखरोट खाते हैं तो आपको दिल की बीमारी होने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

दिल कमजोर होने के क्या लक्षण होते हैं?

दिल कमजोर होने के कुछ सामान्य लक्षण होते हैं- सीढ़ी चढ़ते समय हांफना, एड़ियों में सूजन रहना, सांस लेने में परेशानी होना, घबराहट महसूस होना, थकान महसूस होना। यदि आपको भी यह लक्षण है तब आपको अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेना चाहिए।

हार्ट पेशेंट को कौन सा फल खाना चाहिए?

हार्ट पेशेंट को सेव और खट्टे फल खाने चाहिए क्योंकि इनमें फाइबर पाया जाता है, अंगूर खाना चाहिए जो कि कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है, इसके साथ ही एवोकाडो खाना चाहिए जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।

हार्ट पेशेंट को क्या क्या नहीं खाना चाहिए?

हार्ट पेशेंट को ये चीजें नहीं खानी चाहिए- मैदा, नया चावल, उड़द दाल, कटहल, बैगन, सिंघाड़ा, फास्ट फूड, मांसाहारी भोजन, डिब्बा बंद पदार्थ।

सारांश

दिल से जुड़ी बीमारियां होना हमारी खराब लाइफस्टाइल को बताता है जिस वजह से हम अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं और सही भोजन भी नहीं कर पा रहे हैं जो आगे चलकर दिल की बीमारियों का कारण बन रहा है। जब हमें दिल से जुड़ी बीमारियां होती हैं तब कुछ लक्षण भी देखने में मिलते हैं जैसे कि एड़ियों में सूजन रहती है, सांस लेने में परेशानी महसूस होती है, थकान महसूस होती है, घबराहट होने लगती है। यदि आपको भी इस तरीके के लक्षण हैं तो आपको अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लेना चाहिए।

दिल की बीमारियों को ठीक करने का सबसे कारगर उपाय योग है। नियमित रूप से योग करके दिल से जुड़ी सभी प्रकार की बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। इसके लिए आपको नियमित रूप से ताड़ासन, वृक्षासन, उष्ट्रासन, पश्चिमोत्तानासन, भुजंगासन का अभ्यास करना चाहिए। दिल की बीमारियों में प्राणायाम विशेष रूप से लाभदायक होता है इसके लिए आपको अनुलोम विलोम प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, शीतकारी प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए।

योग और प्राणायाम करने के साथ-साथ आपको अपने भोजन पर भी नियंत्रण रखना चाहिए। डिब्बाबंद पदार्थ, फास्ट फूड, सिंघाड़ा, मांसाहारी भोजन, मैदा इस प्रकार के भोजन से बचना चाहिए और अपने भोजन में फलों को शामिल करना चाहिए जिनमें फाइबर पाया जाता है साथ ही सूखे मेवे जैसे कि बादाम और अखरोट को भी खाना चाहिए। यदि आप नियमित रूप से अखरोट खाते हैं तो आपको दिल से जुड़ी बीमारियां होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। यदि आप धूम्रपान करते हैं तो आपको इसे छोड़ देना चाहिए। यदि इन सभी बातों को ध्यान में रखकर आप योग करेंगे तो बहुत जल्द दिल से जुड़ी किसी भी प्रकार की बीमारी को ठीक कर लेंगे।

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