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गर्भाशय के लिए योग-गर्भाशय को स्वस्थ बनाने के लिए 5 योगासन

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गर्भाशय के लिए योग-गर्भाशय को स्वस्थ बनाने के लिए 5 योगासन

वर्तमान समय में महिलाओं की गर्भाशय और प्रजनन प्रणाली से संबंधित परेशानियां बढ़ती जा रही है। इसका प्रमुख कारण है हमारी खराब दिनचर्या जिसके चलते महिलाएं अपने स्वास्थ्य पर सही तरह से ध्यान नहीं दे पा रही हैं और यह खराब दिनचर्या कई सारी बीमारियों का कारण बनती जा रही है। नियमित रूप से योग करने से हमारा ब्लड सरकुलेशन सही तरीके से कार्य करता है साथ ही गर्भाशय भी मजबूत बनता है इसके अलावा भी हमें अनेको लाभ प्राप्त होते हैं।

यहां पर जो योगासन बताए जा रहे हैं उनका नियमित अभ्यास गर्भाशय को मजबूत बनाने और गर्भाशय से जुड़ी परेशानियों को दूर करने में बहुत ज्यादा कारगर हैं।

गर्भाशय के लिए योग पश्चिमोत्तानासन

➢ पश्चिमोत्तानासन करने से एकाग्रता बढ़ती है, मानसिक शांति प्राप्त होती है, प्रजनन क्षमता बढ़ती है, पेट की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं, पाचन शक्ति मजबूत होती है, पीठ दर्द दूर करता है, रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और यह गर्भाशय के लिए भी लाभदायक होता है।
➢ पश्चिमोत्तानासन करने के लिए पैरों को आगे की तरफ फैला कर जमीन पर बैठ जाएं।
➢ दोनों पैरों को सीधा रखें और अपने घुटनों को भी सीधा रखें।
➢ यह भी पढ़े: साइटिका पेन योग-साइटिका दर्द के लिए योग
➢ अपने दोनों हाथों की हथेलियों को आपस में मिलालें और उन्हें अपने पैरों के तलवों से लगा ले।
➢ अब अपनी कमर को सामने की तरफ झुकाये और अपने सिर को अपने घुटनों से लगा लें।
➢ आरामदायक अवधि के लिए इस स्थिति में रुकना है उसके बाद वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं।

गर्भाशय के लिए योगासन भुजंगासन

➢ भुजंग आसन करने से वक्षस्थल चौड़ा होता है, कमर में लचीलापन आता है, पाचन शक्ति सुधरती है, पेट की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं, गर्भाशय मजबूत होता है, गठिया, कब्ज, ब्रोंकाइटिस, अनिद्रा जैसी बीमारियों के उपचार में सहायक होता है।
➢ भुजंगासन करने के लिए अपने पैरों को सीधा और तलवों को आसमान की तरफ रखते हुए पेट के बल जमीन पर लेट जाना है।
➢ अब अपने दोनों हाथों को वक्षस्थल के दोनों ओर टिकाले।
➢ सांस लेते हुए नाभि के ऊपर तक के हिस्से को ऊपर उठा ले और अपना संतुलन हाथों से बनाए रखें।
➢ कुछ देर इस अवस्था में रुकने के बाद सांस छोड़ते हुए वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं।

गर्भाशय के लिए योग मंडूकासन

➢ मंडूकासन करने से घुटने, जांघ और पैर मजबूत बनते हैं, मंडूकासन सर्दी से भी बचाता है, एकाग्रता बढ़ती है, मन स्थिर रहता है, पेट से अतिरिक्त वायु को बाहर निकाल देता है और पाचन शक्ति को बढ़ाता है साथ ही यह गर्भाशय के लिए भी लाभदायक है।
➢ मंडूकासन करने के लिए पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए अपने पैरों के पंजों पर बैठ जाएं जिससे एड़ियां बाहर की तरफ और पंजे अंदर की तरफ रहे।
➢ अब अपने दोनों हाथों से मुठ्ठी बना लें और उन्हें अपने पेट पर रखें।
➢ सांस छोड़ते हुए सामने की तरफ झुकना शुरू करें और अपने सीने को अपनी जांघों से लगा ले।
➢ अपने सिर को ऊपर उठा कर रखें और सामने की तरफ देखें।
➢ कुछ देर इसी अवस्था में रुके फिर वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं।

गर्भाशय के लिए पवनमुक्तासन योग

➢ पवनमुक्तासन के अभ्यास से हमारा रक्त परिसंचरण तंत्र सही तरीके से कार्य करता है, पैरों और कमर को मजबूती प्रदान करता है, जोड़ों के दर्द में लाभदायक होता है, कब्ज, गैस की परेशानी दूर करता है, पाचन शक्ति को भी मजबूत बनाता है साथ ही यह गर्भाशय के लिए भी लाभदायक है।
➢ पवनमुक्तासन करने के लिए दोनों पैरों को सीधा रखते हुए जमीन पर बैठ जाएं।
➢ अब अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ कर अपनी छाती को अपने घुटनों से लगा ले।
➢ अब अपने दोनों हाथों को अपने पैरों पर लपेट लें और सामने की तरफ देखें।
➢ आरामदायक अवधि के लिए ऐसी स्थिति में रुके फिर वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं।

गर्भाशय के लिए योग सर्वांगासन

➢ सर्वांगासन करने से हमारा रक्त परिसंचरण तंत्र सुधरता है।
➢ यदि आपको त्वचा से संबंधित कोई रोग है तो उसमें भी सर्वांगासन लाभ पहुंचाता है।
➢ मधुमेह, अम्ल, पित्त से संबंधित विकारों के लिए भी लाभदायक है।
➢ बवासीर, दृष्टि रोग में भी सर्वांगासन बहुत लाभ पहुंचाता है साथ ही यह गर्भाशय के लिए भी लाभदायक है।
➢ सर्वांगासन करने के लिए हाथ और पैरों को सीधा रखते हुए जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं।
➢ अब आपको अपने दोनों पैरों को एक साथ ऊपर उठा लेना है।
➢ यह भी पढ़े: ब्रेन ट्यूमर के लिए योग-ब्रेन ट्यूमर से मुक्ति
➢ दोनों पैरों के पंजे आपस में जुड़े हुए होने चाहिए और आपकी नजरें पैरों के अंगूठे की सीध में होनी चाहिए।
➢ इस अवस्था में आपको सामान्य रूप से सांस लेते रहना है और कुछ देर बाद वापस सामान्य स्थिति में आ जाना है।

आमतौर पर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब

गर्भाशय से संबंधित रोगों में कौन सा आसन लाभकारी है?

गर्भाशय से संबंधित रोगों के लिए नौकासन विशेष रूप से लाभकारी होता है। इसे करने से महिलाओं के गर्भाशय और बच्चादानी दोनों से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं।

क्या गर्भाशय का खिसकना ठीक हो सकता है?

जब पेल्विक फ्लोर मांसपेशियां और लिगामेंट कमजोर हो जाते हैं या उनमें खिंचाव आ जाता है और वे गर्भाशय को सहारा नहीं दे पाते ऐसी स्थिति में गर्भाशय खिसक जाता है। नियमित रूप से योगा करके गर्भाशय का खिसकना ठीक किया जा सकता है। इसके लिए आप नियमित रूप से सेतुबंध आसन, तितली आसन, पश्चिमोत्तानासन, सर्वांगासन, पवनमुक्तासन, मंडूकासन, भुजंगासन का नियमित अभ्यास कर सकती हैं।

गर्भाशय में दर्द होने का क्या कारण है?

जब गर्भाशय की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं या उनमें ऐठन आ जाती है तब गर्भाशय में दर्द होता है।

सारांश

वर्तमान समय में महिलाओं की गर्भाशय और प्रजनन प्रणाली से संबंधित परेशानियां बढ़ रही हैं। इनका प्रमुख कारण महिलाओं की खराब दिनचर्या है जिस वजह से वे अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पा रही हैं। स्वास्थ्य पर ध्यान ना देने की वजह से और भी कई परेशानियां सामने आ रही हैं। जब गर्भाशय से जुड़ी परेशानी हो तब योग इन्हें ठीक करने का सबसे कारगर माध्यम है क्योंकि योग करने के लिए ना तो आपको पैसे खर्च करने पड़ते हैं और ना ही आपको महंगी दवाइयों का सेवन करना पड़ता है इसलिए योगा सभी लोग आसानी से कर सकते हैं। यहां पर जिन योगासनों को बताया गया है यदि आप उनका नियमित रूप से अभ्यास करती हैं तो गर्भाशय और प्रजनन अंगों से जुड़ी सभी प्रकार की बीमारियों को कुछ ही समय में दूर कर सकती हैं।

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