शिव पुराण की कथा (3) पवित्र नदियों में स्नान का महत्व

शिव पुराण की कथा (3) पवित्र नदियों में स्नान का महत्व

शिव पुराण की कथा (3) पवित्र नदियों में स्नान का महत्व


शिव पुराण में पवित्र नदियों का वर्णन मिलता है। इन नदियों में स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं और हमें पुण्य की प्राप्ति होती है और इस पुण्य के बल पर हमें सद्गति प्राप्त होती है।

शिव पुराण में सरस्वती नदी को परम पवित्र बताया गया है। सरस्वती नदी की 60 धाराएं या मुख हैं। हिमालय पर्वत से निकली गंगा नदी 100 मुख वाली बताई गई है। सोनभद्र नदी की 10 धाराएं हैं। नर्मदा नदी की 24 धाराएं हैं। तमसा नदी के 12 तथा रेवा नदी के 10 मुख बताए गए हैं। गोदावरी नदी के 21 मुख बताए गए हैं। कृष्णवेणी नदी के 18 मुख, तुंगभद्रा के 10 मुख, सुवर्ण मुखरी के 9 मुख कहे गए हैं। कावेरी नदी के 27 मुख बताए गए हैं।

शिव पुराण के अनुसार सरस्वती नदी की धाराओं के तट पर निवास करने से ब्रह्म पद की प्राप्ति होती है।

मकर राशि में सूर्य होने पर काशी-प्रयाग में गंगा नदी में स्नान करने पर बहुत पुण्य प्राप्त होता है।

बृहस्पति के मकर राशि में होने पर शोणभद्र नदी में स्नान करने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। इस समय वहां स्नान करने और उपवास करने से विनायक पद की प्राप्ति होती है।

नर्मदा नदी में स्नान करने से और उसके तट पर निवास करने से वैष्णव पद की प्राप्ति होती है।

गोदावरी नदी में स्नान करने से ब्रह्महत्या तथा गौवध जैसे पापों का विनाश हो जाता है और रूद्र लोक की प्राप्ति होती है।

कृष्णवेणी नदी समस्त पापों का नाश करने वाली तथा विष्णु लोक प्रदान करने वाली बताई गई है।

तुंगभद्रा में स्नान करने से ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है।

ब्रह्मलोक से लौटे हुए जीव सुवर्ण मुखरी के तट पर ही जन्म लेते हैं।

कावेरी नदी अभीष्ट फलों को देने वाली बताई गई है। कावेरी नदी के तट स्वर्ग लोक, ब्रह्मा और विष्णु का पद देने वाले माने गए हैं। कावेरी नदी के शिव क्षेत्रों में अभीष्ट फल प्राप्त होता है तथा शिव लोक की प्राप्ति होती है।

सिंह और कर्क राशि में सूर्य की संक्रांति होने पर सिंधु नदी में स्नान करने से ज्ञान की प्राप्ति होती है।

जब बृहस्पति सिंह की राशि में हो उस समय सिंह की संक्रांति भाद्रपदमास में गोदावरी नदी में स्नान करने से शिवलोक की प्राप्ति होती है।

सूर्य और बृहस्पति के कन्या राशि में स्थित होने पर यमुना और शोणभद्र में स्नान करने से धर्मराज तथा गणेश जी के लोक में उत्तम भोग प्राप्त होते हैं।

जब सूर्य और बृहस्पति तुला राशि में स्थित होते हैं उस समय कावेरी नदी में स्नान करने से संपूर्ण अभीष्ट वस्तुऍ प्राप्त होती हैं ऐसा भगवान विष्णु का वचन है।

सूर्य और बृहस्पति वृश्चिक राशि पर हो तब अगहन के महीने में नर्मदा नदी में स्नान करने से विष्णु लोक की प्राप्ति हो सकती है।

सूर्य और बृहस्पति के धनु राशि में स्थित होने पर स्वर्णमुखरी नदी में स्नान करने से शिवलोक की प्राप्ति होती है ऐसा ब्रह्मा जी का वचन है।

माघ मास में जब सूर्य और बृहस्पति मकर राशि में स्थित हो उस समय गंगा जी में स्नान करने से शिव लोक की प्राप्ति होती है और शिव लोक के पश्चात ब्रह्मा और विष्णु के स्थानों में सुख भोगने के पश्चात मनुष्य को ज्ञान की प्राप्ति होती है।

माघ मास में तथा सूर्य के कुंभ राशि में होने पर फाल्गुन महीने में गंगा जी में किया हुआ श्राद्ध, पिंडदान और तिल दान पिता तथा नाना दोनों कुलों के पितरों की अनेक पीढ़ियों का उद्धार कर देता है।

सूर्य और बृहस्पति जब मीन राशि में होते हैं तब कृष्णवेणी नदी में स्नान करने से इंद्र पद की प्राप्ति होती है।

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