शिव पुराण की कथा (4) रुद्राक्ष धारण करने का महत्त्व

शिव पुराण की कथा (4) रुद्राक्ष धारण करने का महत्त्व

शिव पुराण की कथा (4) रुद्राक्ष धारण करने का महत्त्व


पूर्व काल में भगवान शंकर मन को संयम में रखकर घोर तप कर रहे थे। एक दिन किसी कारण से भगवान शंकर का मन क्षुब्ध हो गया और उन्होंने अपने नेत्र खोले। नेत्र खोलने पर उनके नेत्रों से जल की कुछ बूंदे गिरी। आंसुओ की बूंदे गिरने से वहां पर रुद्राक्ष नामक वृक्ष पैदा हो गया। रुद्राक्ष परम पावन होता है। रुद्राक्ष के दर्शन से, स्पर्श से, रुद्राक्ष माला पर जप करने से समस्त पापो का अंत हो जाता है।


अपने भक्तों पर अनुग्रह करने के लिए भगवान शंकर ने इन रुद्राक्षों को सभी वर्ण के लोगों में वितरित कर दिया। इन रुद्राक्ष के वृक्षों को मथुरा, काशी, अयोध्या और अन्य देशों में भी लगाया।


मनुष्य को अपने वर्ण के अनुसार अपनी जाति का ही रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। भोग और मोक्ष चाहने वाले लोगों को भगवान शिव-पार्वती की प्रसन्नता के लिए रुद्राक्ष जरूर धारण करना चाहिए।


आँवले के फल के बराबर रुद्राक्ष श्रेष्ठ माना जाता है, बेर के फल के बराबर रुद्राक्ष मध्यम श्रेणी का होता है, चने के बराबर रुद्राक्ष निम्न श्रेणी का माना जाता है।


बेर के फल के बराबर रुद्राक्ष छोटा होने पर भी लोक में उत्तम फल देने वाला और सुख सौभाग्य में बृद्धि करने वाला माना जाता है। जो रुद्राक्ष आँवले के फल के बराबर होता है वह सभी अरिष्टों का विनाश करने वाला होता है।


पापों का नाश करने के लिए रुद्राक्ष धारण करना जरुरी माना जाता है। इस लोक में रुद्राक्ष जैसा फल देने वाला दूसरी कोई माला नहीं है।


जिन रुद्राक्षों को कीड़ों ने दूषित कर दिया हो, टूटे फूटे हो, जिसमें उभरे हुए दाने ना हो, जो पूरा गोल ना हो ऐसे रुद्राक्षों को त्याग देना चाहिए।


जो रुद्राक्ष समान आकार के, चिकने, मजबूत और सुन्दर होते है वे सदैव भोग और मोक्ष देने वाले होते है।


जिस रुद्राक्ष में अपने आप ही डोरी डालने का छेद हो वह उत्तम माना जाता है। जिसमें प्रयत्न करके छेद किया गया हो वह मध्यम श्रेणी का होता है।


रुद्राक्ष धारण करने से बड़े से बड़े पाप का नाश हो जाता है। 1100 रुद्राक्ष धारण करने से मनुष्य को जो फल मिलता है उसका वर्णन सैकड़ों वर्षों में भी नहीं किया जा सकता है। 550 रुद्राक्षों का मुकुट बनाकर उसे सिर पर धारण करना चाहिए। 360 रुद्राक्षों का एक हार बनाना चाहिए और धारण करना चाहिए।


रुद्राक्ष धारण करने वाले पुरुष को मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज का त्याग कर देना चाहिए।


ब्राह्मणों को श्वेत रुद्राक्ष धारण करना चाहिए, क्षत्रियों को गहरे लाल रंग का, वैश्यों को पीला और शूद्रों को काला रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।


रुद्राक्षों के भेद:


एक मुख वाला रुद्राक्ष साक्षात् शिव का स्वरुप माना जाता है। वह भोग और मोक्ष प्रदान करता है।


जहाँ रुद्राक्ष की पूजा की जाती है वहाँ से लक्ष्मी कभी दूर नहीं जाती है। उस स्थान के सभी उपद्रव शांत हो जाते है और वहाँ रहने वाले लोगों की मनोकामनायें पूर्ण होती है।


दो मुख वाला रुद्राक्ष देवदेवेश्वर कहाँ जाता है। वह सम्पूर्ण कामनाओं और फलों को देने वाला होता है।


तीन मुख वाले रुद्राक्ष के प्रभाव से सारी विद्याएँ प्रतिष्ठित होती है।


चार मुख वाला रुद्राक्ष ब्रह्मा का रूप माना जाता है। इसके दर्शन और स्पर्श से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थ प्राप्त होते है।


पांच मुख वाला रुद्राक्ष कालाग्निरूप रूद्र माना जाता है। यह संपूर्ण मनोवांछित फल देने वाला और मुक्ति देने वाला होता है। यह रुद्राक्ष सभी पापों को दूर कर देता है।


छः मुख वाला रुद्राक्ष कार्तिकेय का स्वरूप माना जाता है। इसे दाहिने बाँह में धारण करने से ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त हो सकते है।


सात मुख वाला रुद्राक्ष धारण करने से दरिद्र भी ऐश्वर्यशाली हो जाता है।


आठ मुख वाला रुद्राक्ष धारण करने से मनुष्य पूर्णायु होता है।


नौ मुख वाला रुद्राक्ष धारण करने से मनुष्य सर्वेश्वर हो जाता है।


दस मुख वाला रुद्राक्ष भगवान विष्णु का स्वरुप माना जाता है। इसको धारण करने से मनुष्य की संपूर्ण कामनायें पूर्ण होती है।


ग्यारह मुख वाला रुद्राक्ष धारण करने से मनुष्य सभी जगहें विजयी होता है।


बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मस्तक पर 12 आदित्य विराजमान हो जाते है।


तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से सौभाग्य और मंगल लाभ प्राप्त होता है।


चौदह मुखी रुद्राक्ष शिव रूप माना जाता है। इसको धारण करने से सभी पापों का नाश हो जाता है।


साधक को निद्रा और आलस्य को छोड़कर भक्ति और श्रद्धा से अपने मनोरथों को पूर्ण करने के लिए रुद्राक्ष को धारण करना चाहिए।


रुद्राक्ष की माला धारण करने वाले पुरुष को देखकर भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी, शाकिनी सभी दूर हो जाते है।


रुद्राक्ष माला धारण करने वाले को देखकर भगवान शिव, विष्णु, देवी दुर्गा, गणेश जी, सूर्य देव तथा अन्य देवता भी प्रसन्न होते है।


इस तरह से रुद्राक्ष की महिमा को जानकर धर्म की बृद्धि के लिए भक्ति भाव से रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।


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