भस्त्रिका और कपालभाति में क्या अंतर है | Difference Between Bhastrika And Kapalbhati In Hindi

भस्त्रिका और कपालभाति में क्या अंतर है | Difference Between Bhastrika And Kapalbhati In Hindi

भस्त्रिका और कपालभाति में क्या अंतर है | Difference Between Bhastrika And Kapalbhati In Hindi


(1) भस्त्रिका प्राणायाम कितनी बार करना चाहिए?


भस्त्रिका प्राणायाम दिन में केवल एक बार करना चाहिए। इस प्राणायाम का अभ्यास आप 5 से 10 मिनट के लिए कर सकते है। अस्थमा, कफ, एलर्जी, मधुमेह, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में इसका अभ्यास 10 मिनट तक किया जा सकता है।


(2) भस्त्रिका प्राणायाम कब नहीं करना चाहिए?


खाना खाने के तुरंत बाद, तेज बुखार होने पर, ऑपरेशन होने के तुरंत बाद, चोट लगने पर, तेज सिर दर्द होने पर भस्त्रिका प्राणायाम नहीं करना चाहिए। गर्भावस्था में किसी योग के जानकार या डॉक्टर से सलाह लेकर ही योगाभ्यास करना चाहिए।

(3) भस्त्रिका प्राणायाम से क्या लाभ है?


भस्त्रिका प्राणायाम नाड़ियों को शुद्ध करता है, फेफड़े और दिल को मजबूत बनाता है, कफ और पित्त से होने वाले रोगों को दूर करता है, मोटापा कम करता है, भूख बढ़ाता है, पाचन में सुधार करता है, शारीरिक कमजोरी दूर करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।

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(4) भस्त्रिका और कपालभाति में क्या अंतर है?


भस्त्रिका और कपालभाति दोनों ही योग अभ्यास है। इन दोनों से हमें अनेकों लाभ प्राप्त होते है तब भी इन दोनों में अंतर होता है। भस्त्रिका प्राणायाम करते समय पूरक और रेचक दोनों ही तेज गति से किये जाते है जबकि कपालभाति करते समय तेज गति से श्वास छोड़ते है और सामान्य गति से श्वास लेते है। इन दोनों में एक अंतर यह भी पाया जाता है कि भस्त्रिका मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है जबकि कपालभाति कपाल क्षेत्र को।

(5) भस्त्रिका कैसे करना चाहिए?


भस्त्रिका करने के लिए किसी भी आरामदायक आसन में बैठ जाये। अपने हाथों से ज्ञान मुद्रा बना लें। अपनी आँखों को भी बंद कर लें। अब श्वास को तेजी से थोड़ा-थोड़ा छोड़े। ऐसा करते समय अपने पेट को भी अंदर खींचे। श्वास पूरी तरह से छोड़ देने के बाद सामान्य रूप से श्वास लें। इस तरह से आपको शुरुआत में 3 से 5 मिनट भस्त्रिका का अभ्यास करना है।

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